Pradosh Vrat Date : प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के समस्त दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं। जुलाई 2026 का महीना विशेष है क्योंकि इसमें दो बार महादेव को प्रसन्न करने का अवसर मिल रहा है।
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जुलाई में प्रदोष व्रत की तिथियां
पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जुलाई महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं, जुलाई माह का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि 11 जुलाई की मध्यरात्रि 2:05 बजे से शुरू होकर 12 जुलाई की रात 10:31 बजे तक रहेगी। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘रवि प्रदोष’ कहा जाएगा, जो स्वास्थ्य और तेज प्राप्ति के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
द्वितीय प्रदोष व्रत: जुलाई का दूसरा प्रदोष व्रत 26 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई को दोपहर 1:58 बजे शुरू होकर 27 जुलाई की शाम 4:15 बजे तक रहेगी। चूंकि 26 जुलाई को प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि व्याप्त है, इसलिए शास्त्रानुसार इसी दिन व्रत रखना उत्तम है।
प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय महादेव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ प्रदोष व्रत रखता है, उसे सुख-समृद्धि, लंबी आयु और संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही, वैवाहिक जीवन में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।
विधि-विधान और पूजन की प्रक्रिया
प्रदोष व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए इसकी पूजा विधि का पालन करना आवश्यक है:
संकल्प: व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन मन ही मन ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करें।
उपवास का प्रकार: आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार निराहार या फलाहार व्रत रख सकते हैं।
प्रदोष काल की पूजा: यह व्रत का सबसे महत्वपूर्ण समय है। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में स्नान करके पुनः भगवान शिव के मंदिर जाएं या घर पर ही उनकी पूजा करें। महादेव का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
श्रृंगार और भोग: महादेव को चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर आरती करें और उन्हें सात्विक भोग लगाएं।
कथा श्रवण: पूजा के अंत में ‘प्रदोष व्रत कथा’ का पाठ अवश्य करें। बिना कथा सुने पूजा अधूरी मानी जाती है।
प्रदोष व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और स्वयं को महादेव के चरणों में समर्पित करने का मार्ग है। यदि आप जुलाई 2026 में इन शुभ तिथियों पर व्रत रखते हैं, तो भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद आपके जीवन में सुख और शांति लेकर आएगा।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










