PAK में सियासी तूफान: Board of Peace विवाद पर PM शहबाज शरीफ निशाने पर

दावोस ,स्विट्जरलैंड संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अपने बहुप्रतीक्षित 'बोर्ड ऑफ पीस' (शांति बोर्ड) को औपचारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इसे संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाला चार्टर बताया जा रहा है। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय निकाय के चार्टर पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रम्प ने साफ किया कि उन्होंने भले ही अतीत में

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Published On :

जनवरी 22, 2026

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दावोस ,स्विट्जरलैंड

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अपने बहुप्रतीक्षित 'बोर्ड ऑफ पीस' (शांति बोर्ड) को औपचारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इसे संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने वाला चार्टर बताया जा रहा है। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय निकाय के चार्टर पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रम्प ने साफ किया कि उन्होंने भले ही अतीत में संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की है, लेकिन वह चाहते हैं कि उनका यह नया बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करे।

उन्होंने कहा कि “एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह से गठित हो जाएगा, तो हम जो चाहें, कर सकेंगे और हम इसे संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल बिठाकर करेंगे।” गाजा में सांति स्थापना के लिुए बनाए गए ट्रंप के इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान समेत कई देश शामिल हुए है, जबकि यूरोपीय देशों समेत कुछ मुल्कों ने इसका सदस्य बनने का निमंत्रण ठुकरा दिया है।
पाकिस्तान में बवाल

इधर, पाकिस्तान में अब बवाल उठ खड़ा हुआ है। लोग इसके लिए शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना कर रहे हैं और उन्हें ट्रंप का चाटुकार बता रहे हैं। शहबाज शरीफ सरकार के इस कदम के आलोचकों में पूर्व राजदूत से लेकर कई डिप्लोमेट्स, एक्सपर्ट और बुद्धिजीवी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने इस बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा।

उन्होंने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है, 'पाकिस्तान ने एक ऐसे संगठन (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने का फैसला किया है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प की तरह पेश कर रहे हैं। यह पहल सीधे तौर पर ट्रंप से जुड़ी है और उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद इसके टिके रहने की संभावना नहीं दिखती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा अहम हो गया है?'
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है

पूर्व डिप्लोमेट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पाकिस्तान ने उस बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया है, जिसमें पहले से इजरायल शामिल है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है, दूसरी तरफ उसके शामिल बोर्ड में शामिल हो रहा है। पूर्व डिप्लोमेट के मुताबिक, यह शहबाज शरीफ सरकार की फिलिस्तीन के प्रति गद्दारी है।
फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी

पाकिस्तान के पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने भी शरीफ सरकार के इस कदम की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि सिर्फ ट्रंप को खुश करने के लिए शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने बोर्ड ऑफ पीस में सामिल होने का फैसला किया है, जो युद्ध अपराधों के लिए बदनाम बेंजामिन नेतन्याहू जैसे अपराधियों को जिम्मेदार बताना और फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी है। अवान ने लिखा कि ट्रंप के बूट पॉलिश की आदत ने पाकिस्तान को कहां से कहां पहुंचा दिया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक भूल करार दिया है।
मुस्लिम दुनिया का सबसे बड़ा पाखंड

पाक पत्रकार बकीर सज्जाद ने भी एक्स पर लिखा, 'अफसोस है कि यही वो शांति बोर्ड है जो कुछ मुस्लिम देश ट्रंप की खुशामद और चापलूसी करके बेबस फिलिस्तीनियों के लिए हासिल कर पाए हैं। उन्होंने लिखा कि यह मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंड वाली राजनीतिक मिसाल है। पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान का बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला बिना किसी पब्लिक डिबेट और संसद की राय के लिया गया है, इसलिए यह अमान्य है।

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