PM Modi Speech : महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में जारी ऐतिहासिक चर्चा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी के रुख पर अपनी बात रखी। अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने एक अनूठा राजनीतिक सौहार्द दिखाते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव का विशेष रूप से उल्लेख किया। पीएम मोदी ने सदन में अखिलेश यादव को अपना ‘मित्र’ कहकर संबोधित किया, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच के तनावपूर्ण माहौल को कुछ क्षणों के लिए हल्का कर दिया। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण के प्रावधानों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय और चिंताएं सामने आ रही हैं।
विरोध का राजनीतिक हश्र: प्रधानमंत्री ने दिलाया चुनावी हार का अहसास
प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण के इतिहास और इसके प्रति राजनीतिक दलों के व्यवहार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में जब-जब इस अधिकार की चर्चा हुई है, तब-तब कुछ ताकतों ने इसका कड़ा विरोध किया है। पीएम ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिन-जिन दलों या नेताओं ने अतीत में महिलाओं को मिलने वाले इस हक में अड़ंगा लगाया है, देश की मातृशक्ति ने उन्हें कभी माफ नहीं किया है। उनके अनुसार, विरोध करने वालों को चुनावों में भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने 2024 के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय यह चुनावी मुद्दा इसलिए नहीं बना क्योंकि इसे सर्वसम्मति से पारित करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए थे।
सामूहिक यश की भावना: ‘यह मोदी या किसी एक दल की जीत नहीं’
विधेयक को लेकर हो रही राजनीति पर विराम लगाते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण किसी एक व्यक्ति या दल की निजी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर हम सब इस महान कार्य के लिए साथ आ जाते हैं, तो इतिहास गवाह बनेगा कि यह किसी एक राजनीतिक पक्ष की जीत नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जीत होगी।” मोदी ने जोर देकर कहा कि इस बदलाव का यश न तो केवल ‘ट्रेजरी बेंच’ (सत्ता पक्ष) को मिलेगा और न ही अकेले मोदी को। यह देश की सामूहिक निर्णय शक्ति का परिणाम होगा और इसका श्रेय संसद के हर उस सदस्य को जाएगा जो इसके समर्थन में खड़ा होगा।
राजनीतिक लाभ-हानि का गणित: विरोधियों को पिछले 30 साल का आईना
प्रधानमंत्री ने उन नेताओं और दलों को कड़ा संदेश दिया जो इस विधेयक में ‘राजनीति की बू’ सूंघ रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि जो लोग इसे राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं, उन्हें पिछले 30 वर्षों के अपने राजनीतिक परिणामों का विश्लेषण करना चाहिए। पीएम ने तर्क दिया कि इस विधेयक का समर्थन करने में ही सभी का फायदा है। उन्होंने कहा कि विरोध करने से जो राजनीतिक नुकसान अब तक होता आया है, उससे बचने का यही एकमात्र रास्ता है। प्रधानमंत्री का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना अब केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व के लिए भी अनिवार्य हो गया है।
गैर-राजनीतिक दृष्टिकोण की अपील: राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों से अपील की कि इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक रंग न दिया जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना देश के भविष्य को सुरक्षित करना है। इसे सत्ता और विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन का जरिया बनाने के बजाय एक राष्ट्रव्यापी सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए। पीएम ने विश्वास जताया कि सभी दल अपने मतभेदों को भुलाकर इस ऐतिहासिक बदलाव के साक्षी बनेंगे, जिससे देश की आधी आबादी को विधायी प्रक्रियाओं में उनका उचित हक मिल सके। उनके इस संबोधन ने सदन में एक सकारात्मक विमर्श की नींव रखी है।
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