PM Modi Foreign Visit: विदेश दौरों पर कितना खर्च? सरकार ने संसद में दिया पूरा हिसाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर हुए खर्च को लेकर सरकार ने संसद में जानकारी साझा की है। जवाब में यात्राओं से जुड़े खर्च, आधिकारिक दौरे और अन्य विवरण सामने आए हैं। जानिए पीएम मोदी की विदेशी यात्राओं पर कितना खर्च हुआ और सरकार ने संसद में क्या-क्या बताया।

PM Modi Foreign Visit

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 6, 2026

PM Modi Foreign Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर होने वाला खर्च लंबे समय से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। अब केंद्र सरकार ने राज्यसभा में वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री की सभी आधिकारिक विदेश यात्राओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया है। विदेश राज्य मंत्री शाबिस्ता पबित्र मार्घेरिटा ने लिखित उत्तर में बताया कि इस अवधि में प्रधानमंत्री ने किन-किन देशों का दौरा किया, प्रत्येक यात्रा पर कितना खर्च हुआ और उन दौरों के दौरान किन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। सरकार के अनुसार इन यात्राओं का उद्देश्य केवल कूटनीतिक संबंध मजबूत करना नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी रहा है।

2021 से जुलाई 2026 तक करीब 557 करोड़ रुपये खर्च

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर लगभग 557 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ यात्राओं के अंतिम बिलों का भुगतान अभी शेष है। इसलिए कुल व्यय का आंकड़ा आगे चलकर संशोधित हो सकता है। सरकार का कहना है कि संसद में प्रस्तुत जानकारी उपलब्ध भुगतान और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है।

हर वर्ष का खर्च और प्रमुख यात्राएं

सरकार द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश, अमेरिका, इटली और ब्रिटेन का दौरा किया। इन यात्राओं पर कुल लगभग 36.12 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिनमें अमेरिका यात्रा सबसे महंगी रही और इस पर लगभग 19.63 करोड़ रुपये व्यय हुए। वर्ष 2022 में जर्मनी, डेनमार्क, फ्रांस, नेपाल, जापान, उज्बेकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया सहित कई देशों की यात्राओं पर कुल 55.83 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस वर्ष जून में हुई जर्मनी यात्रा पर सबसे अधिक 14.47 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया।

2023 से 2026 तक बढ़ा विदेश दौरों का दायरा

वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री ने जापान, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी, अमेरिका, मिस्र, फ्रांस, यूएई, दक्षिण अफ्रीका, ग्रीस और इंडोनेशिया सहित कई देशों का दौरा किया। इन यात्राओं पर कुल 93.63 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि जून 2023 की अमेरिका यात्रा सबसे महंगी रही, जिस पर लगभग 22.89 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। वर्ष 2024 में यूएई, कतर, भूटान, रूस, इटली, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, यूक्रेन, ब्रुनेई, सिंगापुर, अमेरिका, लाओस, नाइजीरिया, ब्राजील, गुयाना और कुवैत सहित कई देशों की यात्राओं पर कुल 109.51 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2025 में विदेश यात्राओं पर सबसे अधिक 187.83 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि जुलाई 2026 तक मलेशिया, इजराइल, यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली, स्लोवाकिया, सेशेल्स, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्राओं पर लगभग 74.59 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

पुराने रिकॉर्ड से भी की गई तुलना

सरकार ने संसद में पूर्व वर्षों के कुछ खर्चों का भी उल्लेख किया। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2011 में अमेरिका यात्रा पर लगभग 10.74 करोड़ रुपये और फ्रांस यात्रा पर 8.33 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। वहीं वर्ष 2013 में रूस यात्रा पर 9.95 करोड़ रुपये तथा जर्मनी यात्रा पर 6.02 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि ये वास्तविक खर्च हैं और इनमें महंगाई या विदेशी मुद्रा विनिमय दर के प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है।

समझौतों और निवेश बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का मुख्य उद्देश्य भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। जुलाई 2021 से अब तक इन दौरों के दौरान विभिन्न देशों के साथ सैकड़ों समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें फ्रांस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, इंडोनेशिया, ब्राजील, नीदरलैंड, इजराइल और सेशेल्स जैसे देशों के साथ अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, कृषि, यूपीआई, रक्षा, सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े समझौते शामिल हैं। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को लगभग 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ। सरकार के अनुसार विदेश यात्राओं के माध्यम से भारत की वैश्विक साझेदारी मजबूत हुई है और निवेश तथा रणनीतिक सहयोग के नए अवसर विकसित हुए हैं।

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