Piyush Goyal Deepfake Row : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने कथित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान दिए गए उनके वास्तविक बयान को तकनीक की मदद से एडिट कर एक डीपफेक वीडियो तैयार किया गया, जिसे गलत सूचना फैलाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस तरह की सामग्री का उद्देश्य लोगों को गुमराह करना है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
‘संसद के बाहर दिए बयान को गलत तरीके से एडिट किया गया’
पीयूष गोयल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने जो टिप्पणी की थी, उसे एआई तकनीक की सहायता से दुर्भावनापूर्ण तरीके से संपादित किया गया। उनके अनुसार वीडियो में उनके मूल बयान को बदलकर ऐसा प्रस्तुत किया गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का इस प्रकार गलत इस्तेमाल लोकतांत्रिक संवाद और सार्वजनिक विश्वास के लिए गंभीर चुनौती है।
पुलिस में दर्ज कराई शिकायत, एफआईआर होने की जानकारी दी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार 25 जुलाई 2026 की सुबह चाणक्यपुरी पुलिस थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो किसने बनाया, किसने प्रसारित किया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।
‘फर्जी वीडियो बनाने और फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई’
पीयूष गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डीपफेक वीडियो तैयार करने, उसे सोशल मीडिया पर साझा करने या उसके प्रसार को बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग समाज और देश के हित में होना चाहिए, न कि लोगों को भ्रमित करने या झूठी जानकारी फैलाने के लिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
PIB फैक्ट चेक ने भी वीडियो को बताया फर्जी
केंद्रीय मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई PIB Fact Check ने भी वायरल वीडियो की जांच के बाद उसे फर्जी और एआई से तैयार किया गया बताया है। फैक्ट चेक के अनुसार वीडियो में प्रस्तुत सामग्री वास्तविक बयान से मेल नहीं खाती और उसमें डिजिटल छेड़छाड़ के संकेत पाए गए हैं। इसके बाद लोगों से अपील की गई कि वे ऐसी सामग्री को बिना सत्यापन के साझा न करें।
लोगों से केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील
अपने संदेश में पीयूष गोयल ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी जानकारी पर तुरंत विश्वास न करें। उन्होंने कहा कि किसी भी खबर या वीडियो की सत्यता की पुष्टि केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से ही करनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अफवाहों और भ्रामक सामग्री को आगे साझा करने से बचने की भी अपील की, ताकि समाज में गलत सूचना फैलने से रोका जा सके।
युवाओं की जागरूकता पर जताया भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें भारत के जागरूक और तकनीक-समझ रखने वाले नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं पर पूरा भरोसा है। उनके अनुसार आज की युवा पीढ़ी डिजिटल माध्यमों को बेहतर ढंग से समझती है और सही तथा गलत जानकारी में अंतर करने की क्षमता रखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग भ्रामक वीडियो और डीपफेक जैसी तकनीकों के झांसे में आने के बजाय तथ्यों की जांच करेंगे और जिम्मेदारी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे।
डीपफेक तकनीक को लेकर बढ़ी चिंता
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डीपफेक तकनीक के बढ़ते उपयोग ने दुनिया भर में नई चुनौतियां पैदा की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का दुरुपयोग कर किसी व्यक्ति के बयान, आवाज या वीडियो में बदलाव कर गलत संदेश फैलाया जा सकता है। ऐसे मामलों में समय पर तथ्य जांच, आधिकारिक जानकारी और कानूनी कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी संदर्भ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी लोगों से सतर्क रहने और केवल प्रमाणित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।
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