‘पिंक कोकीन’ से दहशत: अमेरिका में उभरा खतरनाक नशा, खाते ही शरीर का रंग बदलने का दावा

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई चल रही है। कैरेबियन में ड्रग बोट्स पर हमले, वेनेजुएला जैसे देशों पर सैन्य ऑपरेशन, और बड़े पैमाने पर जब्तियां। लेकिन फिर भी अमेरिका में नया खतरनाक ड्रग पिंक कोकीन (जिसे तुसी या Tuci भी कहते हैं) क्लबों और पार्टियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Axios की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग अब बड़े शहरों से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है, और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।   पिंक कोकीन आखिर है क्या? असल में यह कोकीन नहीं है, बल्कि

Wrriten By :

Editor

Published On :

जनवरी 11, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई चल रही है। कैरेबियन में ड्रग बोट्स पर हमले, वेनेजुएला जैसे देशों पर सैन्य ऑपरेशन, और बड़े पैमाने पर जब्तियां। लेकिन फिर भी अमेरिका में नया खतरनाक ड्रग पिंक कोकीन (जिसे तुसी या Tuci भी कहते हैं) क्लबों और पार्टियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Axios की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग अब बड़े शहरों से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है, और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
 
पिंक कोकीन आखिर है क्या?
असल में यह कोकीन नहीं है, बल्कि एक खतरनाक कॉकटेल है यानी कई नशीले पदार्थों का मिश्रण। मुख्य रूप से इसमें केटामाइन (डिसोसिएटिव) और एमडीएमए (एक्सटेसी) होते हैं। जांच में अक्सर मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स, फेंटानिल जैसे घातक तत्व भी मिलते हैं। ऊपर से इसे आकर्षक बनाने के लिए गुलाबी फूड कलरिंग मिलाई जाती है, जो देखने में 'कूल' लगता है। यही वजह है कि हर बैच अलग होता है। कोई हल्का लगता है, तो कोई सीधे जान ले लेता है। ओवरडोज होने पर सांस रुक सकती है, दिल की धड़कन बिगड़ सकती है, और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से नीला पड़ना ( Cyanosis) जैसी स्थिति आ सकती है।

यह ड्रग नहीं, जहर है
दरअसल, हाल के महीनों में अमेरिका के कई बड़े शहरों जैसे लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में पिंक कोकीन से जुड़े छापे और चेतावनियां जारी हुई हैं। 2025 में न्यूयॉर्क में एक तस्करी केस में पिंक कोकीन के साथ दर्जनों हथियार जब्त किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 तक कई मौतें इससे जुड़ी पाई गईं। बताया जा रहा है कि 2024 की शुरुआत से अब तक चार राज्यों में कम से कम 18 मामले सामने आए, जिनमें ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।

कहां से शुरुआत?
अब सवाल उठता है कि इसकी शुरुआत कहां से हुई? बताया जाता है कि इसकी शुरुआत कोलंबिया से मानी जाती है, जहां इसे क्लब और पार्टी ड्रग के तौर पर पेश किया गया। वहां इसे 2सी (एक साइकेडेलिक ड्रग) से प्रेरित होकर 'तुसी' नाम दिया गया और गुलाबी रंग को ब्रांडिंग बना दिया। धीरे-धीरे यह लैटिन अमेरिका से अमेरिका और यूरोप तक फैल गया। एक्सपर्ट का कहना है कि पिंक कोकीन अब सिर्फ एक ड्रग नहीं, बल्कि एक 'कॉन्सेप्ट' बन चुका है। तस्करों को किसी फिक्स सप्लाई की जरूरत नहीं है, जो भी नशे उपलब्ध हों, उन्हें मिलाकर नया बैच तैयार कर देते हैं।

यह कैसे बन जाता है जानलेवा?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा यह है कि पिंक कोकीन का कोई सीधा इलाज या एंटीडोट नहीं है। डॉक्टर और फर्स्ट रिस्पॉन्डर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं, जब तक नशा शरीर से बाहर न निकल जाए। कई बार जान बचाना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब यह ड्रग सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण इलाकों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

Leave a Comment

2