Pilibhit Voter List Scam : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले में निर्वाचन आयोग ने सख्त कदम उठाया है। आयोग ने तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मतदाता पंजीकरण केंद्र पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 198 जोड़ने को कहा गया है। आयोग की इस कार्रवाई से निर्वाचन व्यवस्था में जवाबदेही और मतदाता सूची की शुचिता को लेकर बड़ा संदेश गया है।
दो अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को भेजे पत्र में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग का निर्देश है कि मामले की कानूनी कार्रवाई गंभीरता से आगे बढ़ाई जाए। इसके अलावा विभागीय कार्यवाही को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था दी गई है। आयोग की संस्तुति पर शुरू की गई विभागीय जांच को किसी अधिकारी के लिखित स्पष्टीकरण के आधार पर समाप्त करने से पहले अनुशासनिक प्राधिकारी को निर्वाचन आयोग से परामर्श करना होगा। यानी संबंधित अधिकारियों को केवल स्पष्टीकरण के आधार पर राहत नहीं दी जा सकेगी।
मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के लगे थे आरोप
दरअसल, पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए थे। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बदलाव और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने इसकी जांच कराई। जांच के दौरान ईसीआईनेट पोर्टल पर कंप्यूटर सहायक की लॉगिन आईडी के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया। इसके बाद मतदाताओं के विवरण में संशोधन के लिए दर्ज आवेदनों की पड़ताल की गई।
13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज होने से बढ़ा विवाद
जांच में सामने आया कि 31 मई से 29 अगस्त के बीच ईसीआईनेट पोर्टल पर कंप्यूटर सहायक की लॉगिन आईडी का कथित इस्तेमाल करके मतदाताओं के विवरण में संशोधन के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज किए गए थे। इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकृत कर दिए गए, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त किए गए। हालांकि, इन आवेदनों से जुड़े मूल फॉर्म और सहायक दस्तावेज संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले। दस्तावेजों का नहीं मिलना जांच का महत्वपूर्ण आधार बना और मामले की गंभीरता बढ़ गई।
प्रदेशभर के मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर भी सख्ती
पीलीभीत प्रकरण सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के सभी जिलों में मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर सहायकों की ईसीआईनेट पोर्टल लॉगिन आईडी निष्क्रिय कराने के निर्देश दिए थे। इसका उद्देश्य पोर्टल के अनधिकृत इस्तेमाल और मतदाता विवरण में संभावित गड़बड़ियों को रोकना था। जिला निर्वाचन अधिकारियों को संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों से इसकी पुष्टि कराने के लिए भी कहा गया था। इस कदम के जरिए निर्वाचन प्रक्रिया में डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही मजबूत करने की कोशिश की गई।
सभी विधानसभा क्षेत्रों से मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट
निर्वाचन आयोग ने इस मामले को केवल पीलीभीत तक सीमित नहीं रखा है। आयोग ने प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में की गई कार्रवाई का जिला निर्वाचन अधिकारियों से व्यक्तिगत सत्यापन कराने और अनुपालन रिपोर्ट भेजने को कहा है। अब अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं। पीलीभीत मामले में दो ईआरओ के निलंबन और एफआईआर में नई धारा जोड़ने के निर्देशों के बाद निर्वाचन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नजर बढ़ गई है। आने वाले समय में जांच और विभागीय कार्रवाई से इस पूरे प्रकरण की अन्य जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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