Crude Oil Price : ईरान को लेकर जारी युद्ध के बीच कूटनीतिक बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को थोड़ी राहत दी है। ईरान और कतर के अधिकारियों के बीच लगातार तीसरे दिन हुई चर्चा के बाद सोमवार, 2 नवंबर को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दोनों प्रमुख बेंचमार्क एक प्रतिशत से अधिक टूटे। बाजार में इस गिरावट को पिछले सप्ताह हुई तेज बढ़त के बाद सुधार और युद्ध का तनाव कम होने की उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है।
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में गिरावट
कारोबार के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड वायदा 1.59 डॉलर यानी करीब 1.40 प्रतिशत गिरकर 111.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत 1.56 डॉलर यानी 1.50 प्रतिशत घटकर 102.56 डॉलर प्रति बैरल रही। बाद के कारोबार में गिरावट और बढ़ी। रॉयटर्स के मुताबिक, सोमवार को ब्रेंट करीब 3.2 प्रतिशत टूटकर 109.75 डॉलर और डब्ल्यूटीआई करीब 3.3 प्रतिशत गिरकर 100.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञ ने बताया कीमतों में गिरावट का कारण
केसीएम ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वॉटरर के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेल की कीमतों में बड़ी तेजी के बाद बाजार में तकनीकी सुधार देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही ईरान और कतर के बीच जारी बातचीत से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनी है। सप्ताहांत में किसी बड़े सैन्य टकराव की खबर नहीं आने से भी बाजार पर तत्काल दबाव कम हुआ है।हालांकि, वॉटरर ने इसे स्थायी राहत मानने से आगाह किया है। उनका कहना है कि ईरान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सैन्य तनाव फिर बढ़ा, तो तेल की कीमतें दोबारा तेजी पकड़ सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद हालात बिगड़ने पर ब्रेंट क्रूड का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।

ईरान ने बातचीत के साथ रक्षा की तैयारी भी रखी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि कतर के मध्यस्थों के साथ बातचीत और विचार-विमर्श जारी रखना तेहरान की प्राथमिकता है। उन्होंने वार्ता को आगे बढ़ती हुई बताया। साथ ही स्पष्ट किया कि ईरान कूटनीतिक समाधान की कोशिशों के साथ अपनी रक्षा के लिए भी तैयार है। इस बयान से संकेत मिलता है कि बातचीत के बावजूद ईरान ने सुरक्षा और सैन्य विकल्पों को खुला रखा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों से बढ़ी चिंता
तेल बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बनी हुई है। इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमलों की घटनाओं ने आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ा दी है। इस मार्ग पर तनाव का असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री परिवहन और माल ढुलाई की लागत पर भी पड़ रहा है।
ओपेक प्लस ने उत्पादन लक्ष्य में नहीं किया बदलाव
इस बीच, ओपेक प्लस देशों ने दिसंबर के लिए तेल उत्पादन लक्ष्य को पहले के स्तर पर बनाए रखने का फैसला किया है। युद्ध और निर्यात में आ रही बाधाओं के बीच उत्पादक देशों का यह फैसला बाजार के लिए अहम है। फिलहाल तेल की कीमतों की दिशा ईरान-कतर वार्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में आगे के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर कीमतों में फिर उछाल आने की आशंका बनी हुई है।
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