RG Kar Case : पश्चिम बंगाल के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पीड़िता की मां और पनिहाटी से बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने मामले की जांच पर असंतोष जताते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय बाद भी जांच में ऐसी ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही, जिससे परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हो सके।
सीबीआई जांच पर उठाए सवाल
रत्ना देबनाथ ने कहा कि उनके परिवार ने कभी इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग नहीं की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई अब तक जांच को उस दिशा में आगे नहीं बढ़ा पाई है, जिसकी पीड़ित परिवार को उम्मीद थी। उन्होंने साफ कहा कि अगर एजेंसी अपना काम प्रभावी तरीके से नहीं कर पा रही है, तो उसे जांच से हट जाना चाहिए।
पीड़िता के माता-पिता पहले भी कई बार जांच की गति और उसके नतीजों को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। परिवार का कहना है कि जिन अन्य लोगों की भूमिका पर उन्हें संदेह है, उन्हें अब तक न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में नहीं लाया गया है। हालांकि, इस मामले में पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को जनवरी 2025 में अदालत ने दोषी ठहराया था और उसे शेष जीवन तक कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा कथित व्यापक साजिश और घटना के बाद तथ्यों को दबाने के आरोपों की जांच भी अलग स्तर पर जारी है।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को मिली थी जांच
आरजी कर अस्पताल की घटना 9 अगस्त 2024 को सामने आई थी। इसके बाद देशभर में डॉक्टरों और आम लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। मामले की शुरुआती जांच कोलकाता पुलिस कर रही थी, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 13 अगस्त 2024 को जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
मई 2026 में हाईकोर्ट ने घटना से जुड़े कथित तथ्यों को दबाने और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों की पड़ताल के लिए सीबीआई की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित करने का आदेश भी दिया था। सितंबर में एजेंसी ने कथित साजिश की जांच से जुड़ी रिपोर्ट अदालत में सीलबंद लिफाफे में जमा की थी। इस मामले में अगली सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित है।

मेडिकल कॉलेजों में भ्रष्टाचार का आरोप
सीबीआई जांच पर सवाल उठाने के साथ रत्ना देबनाथ ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बावजूद चिकित्सा संस्थानों की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, पहले से व्यवस्था से जुड़े कई लोग अब भी प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं और भ्रष्टाचार की समस्या कम नहीं हुई है।
रत्ना देबनाथ ने दावा किया कि उन्हें अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में कथित अनियमितताओं से जुड़ी कई फाइलें मिली हैं। वह चाहती हैं कि इन दस्तावेजों में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वह यह मुद्दा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सामने उठाएंगी।
बीजेपी के टिकट पर विधायक बनीं रत्ना देबनाथ
बेटी को न्याय दिलाने की मांग के बीच रत्ना देबनाथ ने राजनीति में कदम रखा था। उनका मानना था कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बिना न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। इसी मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पनिहाटी सीट से जीत हासिल कर विधायक बनीं।
अब विधायक बनने के बाद उन्होंने आरजी कर मामले की जांच और मेडिकल कॉलेजों में कथित भ्रष्टाचार को फिर से प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि बेटी को न्याय दिलाने और चिकित्सा संस्थानों में जवाबदेही तय कराने की उनकी लड़ाई जारी रहेगी। ऐसे में सीबीआई की जांच, अदालत में चल रही सुनवाई और राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कथित अनियमितताओं पर आगे होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
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