UP News: अब पीलीभीत में बनेगी वैक्सीन और इंसुलिन, योगी सरकार ने बनाया बड़ा प्लान

योगी सरकार पीलीभीत को उत्तर प्रदेश का नया बायो-फार्मा हब बनाने की तैयारी में है। अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें 200 एकड़ में बायो-फार्मा पार्क बनेगा। यहां वैक्सीन, इंसुलिन और जीन थेरेपी का उत्पादन बढ़ाने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे।

UP News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

नवम्बर 3, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

UP News: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए योगी सरकार अब छोटे शहरों और तराई क्षेत्रों पर भी खास ध्यान दे रही है। इसी कड़ी में पीलीभीत को फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी उद्योग का नया केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है। सरकार यहां 200 एकड़ जमीन पर आधुनिक बायो-फार्मा पार्क विकसित कर रही है। इस पार्क में वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी आधुनिक दवाओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की योजना है कि इससे पीलीभीत में निवेश आए, नए उद्योग लगें और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर मौके मिलें।

पीलीभीत में 200 एकड़ में बनेगा बायो-फार्मा पार्क

पीलीभीत की अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से 951.79 एकड़ में आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसी औद्योगिक क्षेत्र के भीतर 200 एकड़ जमीन बायो-फार्मा पार्क के लिए तय की गई है।

उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के डायरेक्टर एवं विशेष विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि औद्योगिक विकास सिर्फ लखनऊ, नोएडा और कानपुर जैसे बड़े शहरों तक सीमित न रहे। छोटे शहरों में भी निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इसी सोच के तहत पीलीभीत में यह परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है।

औद्योगिक क्षेत्र में 575.79 एकड़ जमीन औद्योगिक भूखंडों के लिए, 60.98 एकड़ कॉमन फैसिलिटी और 109.23 एकड़ ग्रीन एरिया के लिए निर्धारित है। वहीं 96.20 एकड़ में सड़क नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके अलावा आबादी और दूसरी जरूरतों के लिए भी जमीन का प्रावधान किया गया है। फिलहाल यहां 14 औद्योगिक भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं।

वैक्सीन, इंसुलिन और जीन थेरेपी का होगा उत्पादन

इस बायो-फार्मा पार्क की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाले आधुनिक मेडिकल उत्पाद होंगे। यहां ऐसी कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी जैविक दवाओं का निर्माण करती हैं।ये दवाएं कई गंभीर बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इस पार्क के विकसित होने से उत्तर प्रदेश में हाईटेक दवा निर्माण और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

डॉ. जीएन सिंह के अनुसार, पीलीभीत का तापमान और यहां की जलवायु भी बायो-फॉर्मूलेशन से जुड़ी गतिविधियों के लिहाज से अनुकूल मानी जा रही है। जैविक दवाओं के उत्पादन और भंडारण में तापमान का खास ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए इस क्षेत्र की परिस्थितियां ऐसे उद्योगों के लिए उपयोगी हो सकती हैं।

नेपाल सीमा से नजदीकी और रेलवे कनेक्टिविटी से मिलेगा फायदा

पीलीभीत में इस औद्योगिक परियोजना के लिए एक और बड़ी अच्छी बात इसकी लोकेशन है। यह इलाका नेपाल सीमा के करीब है और यहां से रेलवे कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। इसके अलावा बरेली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से भी इसकी अच्छी पहुंच है।

भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र पीलीभीत शहर से करीब 36 किलोमीटर, बरेली से 100 किलोमीटर और लखनऊ व दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इससे कंपनियों को कच्चा माल मंगाने और तैयार दवाओं को दूसरी जगहों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। नेपाल से नजदीकी के चलते भविष्य में निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट और स्किल डेवलपमेंट से युवाओं को मिलेगा रोजगार

सरकार की योजना सिर्फ फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं है। इस परियोजना के साथ बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुशल युवाओं को तैयार करने पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए बायोटेक्नोलॉजी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट विकसित करने और स्किल डेवलपमेंट व इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग बनाने की योजना है।

इससे युवाओं को फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी उद्योग की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षण मिल सकेगा। साथ ही नई तकनीकों पर रिसर्च, नवाचार और स्टार्टअप शुरू करने के रास्ते भी खुलेंगे।

कुल मिलाकर, पीलीभीत में बनने वाला बायो-फार्मा पार्क तराई क्षेत्र की औद्योगिक पहचान बदलने की क्षमता रखता है। अगर परियोजना योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में पीलीभीत दवा निर्माण, बायोटेक्नोलॉजी और रोजगार के नए अवसरों के लिहाज से उत्तर प्रदेश का अहम केंद्र बन सकता है।

2