Pawan Khera Bail Verdict: पवन खेड़ा को गौहाटी हाईकोर्ट से बड़ा झटका, पासपोर्ट विवाद मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज

गौहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 24, 2026

Pawan Khera Bail Verdict: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामले में गौहाटी हाईकोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब कांग्रेस नेता पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

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क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ पवन खेड़ा द्वारा 5 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली और गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस है। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास एक से अधिक पासपोर्ट और ‘गोल्डन कार्ड’ हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी की विदेशों में संपत्ति है, जिसका जिक्र मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है। इन आरोपों को निराधार बताते हुए रिनिकी भुइयां सरमा ने 6 अप्रैल को गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कराई थी।

राजनीति बनाम कानूनी प्रक्रिया

न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की एकल पीठ के समक्ष इस मामले की विस्तृत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों ने अपनी ओर से कड़े तर्क रखे:

बचाव पक्ष (अभिषेक मनु सिंघवी): खेड़ा की ओर से पेश दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने तर्क दिया कि आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। सिंघवी ने कहा कि खेड़ा के भागने का कोई खतरा नहीं है और यह मामला अधिकतम ‘मानहानि’ का हो सकता है, जिसके लिए हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।

अभियोजन पक्ष (असम सरकार): असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह केवल मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और दस्तावेजों की हेराफेरी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट और ट्रांजिट बेल का घटनाक्रम

इससे पहले, पवन खेड़ा को 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट से एक सप्ताह की ट्रांजिट रिमांड मिली थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की अपील पर उस आदेश पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को निर्देश दिया था कि वे असम की सक्षम अदालत (गौहाटी हाईकोर्ट) में ही जमानत के लिए गुहार लगाएं। अब हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद खेड़ा के पास कानूनी विकल्प सीमित हो गए हैं।

एफआईआर में लगी गंभीर धाराएं

गुवाहाटी पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें शामिल हैं—

चुनाव के संबंध में मिथ्या कथन देना।

धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करना।

आपराधिक मानहानि।

सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना।

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