Pawan Khera News: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के लिए राहत भरी खबर सामने आई है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। पवन खेड़ा पर असम में दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी, लेकिन शीर्ष अदालत के इस फैसले ने विपक्षी खेमे में नई ऊर्जा भर दी है। इस न्यायिक निर्णय के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, विशेषकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे लोकतंत्र की जीत और सत्ताधारी दल की हार करार दिया है।
अनुराग ढांडा का तीखा हमला
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा को मिली जमानत इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों और कानून का इस्तेमाल केवल चुनाव को प्रभावित करने के लिए कर रही है। ढांडा के अनुसार, “बीजेपी का एकमात्र मकसद अपने विरोधियों को डराना-धमकाना है। चुनाव आयोग की कथित शह पर सुरक्षा बलों और जांच संस्थाओं को एक राजनीतिक टूल (Political Tool) में तब्दील कर दिया गया है, ताकि विपक्षी दल चुनावी मैदान में कमजोर पड़ जाएं।”
चुनावी निष्पक्षता पर सवाल
अनुराग ढांडा ने केवल कांग्रेस का ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल का उदाहरण देते हुए ईडी (ED) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले जानबूझकर IPAC (प्रशांत किशोर की टीम) के ठिकानों पर रेड की गई थी। ढांडा ने कहा कि 10 दिन पहले कर्मचारियों को गिरफ्तार करना और कैंपेन को ठप करना ममता बनर्जी के प्रचार अभियान को बाधित करने की एक सोची-समझी साजिश थी। उनके अनुसार, बीजेपी का लक्ष्य चुनाव को नीतियों से नहीं बल्कि ‘एजेंसियों के दबाव’ से जीतना रह गया है, जिसके कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में नजर आ रही है।
असम पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए
AAP प्रवक्ता ने असम पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब देश में चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होती है, तब पुलिस प्रशासन सीधे चुनाव आयोग के अधीन होता है। इसके बावजूद, असम पुलिस ने अन्य राज्यों में जाकर छापेमारी की और विपक्षी नेताओं को दबाने का प्रयास किया। ढांडा ने तंज कसते हुए कहा कि जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, वैसे ही निचली अदालतों से इन लोगों को जमानत मिलने लगती है, जो यह साबित करता है कि दर्ज किए गए मामले केवल तात्कालिक राजनीतिक लाभ और दबाव बनाने के उद्देश्य से प्रेरित थे।
विवाद की जड़
यह पूरा कानूनी विवाद उस समय शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी अघोषित संपत्तियां मौजूद हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था। अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है।










