Parliament Special Session 2026: संसद के 2026 के तीन दिवसीय विशेष सत्र का समापन एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के साथ हुआ। लंबे समय से प्रतीक्षित महिला आरक्षण (131वां संशोधन) बिल लोकसभा में आवश्यक बहुमत जुटाने में विफल रहा और गिर गया। इस घटनाक्रम ने देश की आधी आबादी, जो राजनीति में समान प्रतिनिधित्व की उम्मीद लगाए बैठी थी, को गहरा झटका दिया है।
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वोटिंग के आंकड़े और संवैधानिक अड़चन

शुक्रवार शाम को हुई वोटिंग के दौरान सदन में मौजूद सांसदों की संख्या और मतों के विभाजन ने बिल के भविष्य का फैसला किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार
कुल पड़े वोट: 528
पक्ष में: 298
विपक्ष में: 230
आवश्यक बहुमत
संवैधानिक संशोधन के लिए सदन की कुल सदस्यता के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। यह बिल जादुई आंकड़े से 54 वोट पीछे रह गया। पहले दौर की वोटिंग में भी केवल 278 वोट ही पक्ष में पड़े थे, जिससे संकेत मिल गया था कि बिल की राह आसान नहीं है।
सत्ता पक्ष का तर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर बिल का समर्थन करने की भावुक अपील की थी, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने इसके तकनीकी पहलुओं, विशेषकर परिसीमन (Delimitation), पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। शाह ने तर्क दिया कि मौजूदा समय में संसदीय क्षेत्रों के आकार में भारी विसंगति है।
उन्होंने उदाहरण दिया कि जहां कुछ क्षेत्रों में केवल 60 हजार मतदाता हैं, वहीं कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 49 लाख तक पहुंच गई है। इतने बड़े क्षेत्र का प्रबंधन एक सांसद के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। सरकार का मानना था कि महिला आरक्षण को नए परिसीमन के साथ जोड़ना प्रशासनिक और लोकतांत्रिक न्याय के लिए अनिवार्य है।
विपक्ष का कड़ा प्रहार
विपक्ष ने इस बिल के स्वरूप और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर तीखी आपत्ति जताई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे महिलाओं के साथ एक “छलावा” करार दिया। उनका तर्क था कि बिल का मौजूदा ढांचा वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय चुनावी गणित को बदलने और राजनीतिक लाभ लेने की एक कोशिश है। उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बिल मौजूदा स्वरूप में पारित नहीं हो पाएगा।
वहीं, प्रियंका गांधी ने इस परिणाम को लोकतंत्र की जीत बताया। कांग्रेस की मुख्य आपत्ति दो बिंदुओं पर केंद्रित थी:
OBC कोटा का अभाव: विपक्ष का कहना था कि बिना ओबीसी महिलाओं के आरक्षण के, यह बिल अधूरा है।
पुराणी जनगणना और परिसीमन: विपक्ष ने पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण से जोड़ने का विरोध किया और इसे “संविधान की मूल भावना के खिलाफ” बताया।
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