Paratha Side Effects: पराठा भारतीय परिवारों में नाश्ते का एक बेहद लोकप्रिय विकल्प माना जाता है। सुबह-सुबह गरमा-गरम आलू पराठा, पनीर पराठा या सादा पराठा दही, अचार, मक्खन या चाय के साथ खाना कई लोगों को बहुत पसंद होता है। स्वाद और पेट भरने की वजह से यह नाश्ता लंबे समय से लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। लेकिन अगर पराठे का सेवन रोजाना और अधिक मात्रा में किया जाए, तो यह शरीर के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार पराठा अपने आप में खराब भोजन नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि पराठा कैसे बनाया जा रहा है, उसमें कितना तेल, घी या मक्खन इस्तेमाल हो रहा है, उसे किस चीज के साथ खाया जा रहा है और व्यक्ति की लाइफस्टाइल कैसी है। अगर खानपान संतुलित न हो और शारीरिक गतिविधि कम हो, तो पराठा सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
वजन बढ़ने का खतरा
पराठे में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। लेकिन जब यही ऊर्जा खर्च नहीं होती, तो शरीर इसे फैट के रूप में जमा करना शुरू कर देता है। खासकर अगर पराठा ज्यादा तेल, घी या मक्खन में बनाया गया हो, तो उसमें कैलोरी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। रोजाना ऐसे पराठे खाने से वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।
ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर
ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले पराठे खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। यह उन लोगों के लिए अधिक चिंता की बात हो सकती है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या जिनकी फिजिकल एक्टिविटी कम है। शरीर जब अतिरिक्त ऊर्जा का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत पर असर
अगर पराठा नियमित रूप से अधिक घी, मक्खन या तेल के साथ खाया जाए, तो शरीर में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ सकती है। इससे खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा रहता है, जो दिल से जुड़ी बीमारियों की आशंका को बढ़ा सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर या हार्ट प्रॉब्लम से जूझ रहे लोगों को पराठे का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
पाचन संबंधी परेशानी
तेल और घी से बने भारी पराठे पचने में ज्यादा समय लेते हैं। रोजाना ऐसे पराठे खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, अपच, पेट फूलना या भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि पराठे के साथ पर्याप्त मात्रा में फाइबर, सलाद या प्रोटीन न लिया जाए, तो पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
पोषण की कमी हो सकती है
हर दिन एक ही तरह का नाश्ता करने से डाइट में विविधता कम हो जाती है। अगर रोजाना सिर्फ पराठा ही खाया जाए, तो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। लंबे समय में यह पोषण असंतुलन का कारण बन सकता है। इसलिए पराठा कभी-कभी और संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है। इसे कम तेल में बनाकर दही, सलाद या प्रोटीन वाली चीजों के साथ खाया जाए, तो नुकसान कम किया जा सकता है।
उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक, टाइगर रिजर्व के सुनहरे भविष्य की जगी उम्मीद










