Pappu Yadav News: बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को अदालत से अभी कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर होने वाली अहम सुनवाई अंतिम समय में टल गई। इसके चलते उन्हें फिलहाल पटना की बेउर जेल में ही रहना पड़ेगा। सुनवाई टलने की खबर के बाद उनके समर्थकों में निराशा देखी गई, जबकि राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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31 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी
पप्पू यादव की गिरफ्तारी एक ऐसे केस में हुई है, जिसकी जड़ें करीब साढ़े तीन दशक पुरानी हैं। प्रशासन के मुताबिक, इस मामले में अदालत ने उन्हें कई बार पेश होने के निर्देश दिए थे। लेकिन बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए वारंट जारी कर दिया। इसी आदेश के तहत बिहार पुलिस ने शुक्रवार देर रात उन्हें हिरासत में लिया। शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जेल भेजने की कार्रवाई शुरू हुई।
तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल

गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। इसके चलते उन्हें तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। रविवार दोपहर अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें भारी सुरक्षा के बीच बेउर जेल ले जाया गया। जेल पहुंचने पर उनकी बायोमीट्रिक जांच और फिंगरप्रिंट की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान जेल और अस्पताल के बाहर मौजूद समर्थकों ने जोरदार प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया।
क्या है पूरा कानूनी विवाद?
यह मामला पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि पप्पू यादव और उनके साथियों ने धोखाधड़ी के जरिए उनका मकान किराए पर लिया था। यह मामला वर्षों से अदालत में लंबित था। कानूनी जानकारों के अनुसार, पेशी में लगातार अनुपस्थिति के कारण मामला गंभीर होता चला गया और अंततः वारंट जारी होने के बाद गिरफ्तारी की नौबत आई। वहीं, पप्पू यादव के समर्थकों का कहना है कि इतने पुराने केस को अचानक सक्रिय करना राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।
राजनीति गरमाई, कांग्रेस का समर्थन
पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मच गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा उनके समर्थन में सामने आए हैं। प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर गिरफ्तारी को गलत और अन्यायपूर्ण बताया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब कोई जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों, महिलाओं के खिलाफ अपराध या प्रशासनिक विफलताओं पर आवाज उठाता है, तो सरकार पुरानी फाइलें खोलकर दबाव बनाने की कोशिश करती है। विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश करार दिया है।
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आगे क्या?
अब सभी की नजरें अगली सुनवाई की तारीख पर टिकी हैं। जमानत याचिका पर फैसला आने तक पप्पू यादव को जेल में ही रहना होगा। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम बन चुका है, जिसका असर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति पर साफ नजर आ सकता है।










