Papankusha Ekadashi 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व भी होता है। लेकिन एकादशी व्रत को बेहद ही खास माना जाता है, जो कि हर माह में दो बार पड़ती है। ऐसे साल में कुल 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं जो कि जगत के पालनहार भगवान श्री हरि को समर्पित है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं और दिनभर उपवास आदि भी रखते हैं, मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और कष्टों का निवारण हो जाता है।
पंचांग के अनुसार अभी आश्विन माह चल रहा है और इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस पावन दिन व्रत पूजन करने से सभी पापों का नाश हो जाता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। ऐसे में हम आपको पापांकुशा एकादशी की तारीख, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे हैं।
पापांकुशा एकादशी का महत्व

हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है। सरल शब्दों में कहें तो शारदीय नवरात्रि के ठीक दो दिन बाद और विजया दशमी यानी दशहरा के अगले दिन यह व्रत किया जाता है। कहा जाता है कि इस पावन दिन अगर सच्चे मन से व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साधना आराधना की जाए तो सभी पाप और कष्टों का नाश हो जाता है और सुख समृद्धि व धन की प्राप्ति होती है।
इस व्रत के प्रभाव से साधक को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवनकाल में सुख, सौभाग्य व वैभव में वृद्धि होती है।
एकादशी की तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर हो रहा है और इसका समापन 22 अक्टू2बर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर हो जाएगा। वहीं उदया तिथि के अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर दिन गुरुवार को किया जाएगा।
व्रत पारण का समय

आपको बता दें कि इस व्रत का समापन यानी पारण सही समय पर करना जरूरी है। 22 अक्टूबर को व्रत रखने वाले भक्त अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को व्रत का पारण कर सकते हैं। यह पारण सुबह 6 बजकर 27 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 42 मिनट के मध्य पारण किया जा सकता है। इसी अवधि के दौरान अन्न या जल ग्रहण करके व्रत का समापन करना शुभ रहेगा।
Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा जितिया व्रत, जानें










