Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा जितिया व्रत, जानें इसका महत्व

जितिया व्रत आज माताओं की आस्था का पर्व है। संतान की लंबी उम्र, सुरक्षा और स्वास्थ्य की कामना के लिए महिलाएं निर्जला उपवास रख रही हैं। शाम को जिउतिया माता की पूजा और कथा होगी।

Jitiya Vrat 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 3, 2026

Jitiya Vrat 2026: देश के कई हिस्सों में माताएं आज अपनी संतानों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत रख रही हैं। यह व्रत मातृ प्रेम और संतान के प्रति समर्पण से जुड़ा प्रमुख धार्मिक पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतानों की आरोग्यता, सुरक्षा और दीर्घायु की कामना करती हैं और पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करती हैं।

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निर्जला व्रत में कठिन तपस्या करती हैं महिलाएं

Jitiya Vrat 2026
माताओं ने रखा जितिया व्रत

जितिया व्रत की सबसे खास बात इसका निर्जला स्वरूप है। व्रत रखने वाली महिलाएं निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार दिनभर अन्न और जल का सेवन नहीं करती हैं। कठिन होने के बावजूद माताएं अपनी संतानों की खुशहाली और दीर्घ जीवन की प्रार्थना के साथ पूरे समर्पण से यह व्रत रखती हैं। परिवार की महिलाएं भी इस अवसर पर पूजा की तैयारियों में सहयोग करती हैं।

शाम को होती है विशेष पूजा और कथा

दिनभर व्रत रखने के बाद शाम के समय महिलाएं सामूहिक या पारिवारिक रूप से पूजा करती हैं। इस दौरान जिउतिया माता की कथा सुनी जाती है और धार्मिक विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। कथा श्रवण को व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के दौरान महिलाएं अपनी संतान की रक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

जिउतिया माता की कथा का विशेष महत्व

Jitiya Vrat 2026
माताओं ने रखा जितिया व्रत

जितिया व्रत से जुड़ी धार्मिक कथाओं का भारतीय परंपरा में विशेष महत्व है। व्रत रखने वाली महिलाएं श्रद्धा के साथ जिउतिया माता की कथा सुनती हैं और उसके धार्मिक संदेश को आत्मसात करने का प्रयास करती हैं। कथा के माध्यम से मातृत्व, त्याग, विश्वास और संतान की सुरक्षा से जुड़े भावों को प्रमुखता दी जाती है। यही वजह है कि पूजा के दौरान कथा श्रवण को आवश्यक धार्मिक परंपरा माना जाता है।

परिवार में दिखता है उत्सव और आस्था का माहौल

जितिया व्रत के अवसर पर घरों में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहता है। महिलाएं पूजा सामग्री तैयार करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत की तैयारी करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा और कथा का आयोजन करती हैं। इससे परिवार और समाज में धार्मिक आस्था के साथ आपसी जुड़ाव और सामूहिक सहभागिता का माहौल भी देखने को मिलता है।

मातृत्व और संतान के रिश्ते को समर्पित पर्व

जितिया व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां और संतान के भावनात्मक रिश्ते से भी जुड़ा पर्व है। संतान के प्रति मां की चिंता, प्रेम और सुरक्षा की भावना इस व्रत में प्रमुख रूप से दिखाई देती है। महिलाएं कठिन निर्जला उपवास के दौरान भी अपनी संतानों के स्वस्थ, सुरक्षित और दीर्घ जीवन की प्रार्थना करती हैं। यही भाव इस पर्व को विशेष बनाता है।

पूजा के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार आगे बढ़ता है व्रत

Jitiya Vrat 2026
माताओं ने रखा जितिया व्रत

जितिया व्रत के दौरान महिलाएं पूजा, कथा और धार्मिक अनुष्ठानों को अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूरा करती हैं। व्रत की समाप्ति भी निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा और पारंपरिक प्रक्रियाओं में कुछ स्थानीय अंतर देखने को मिल सकते हैं, लेकिन संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना इस पर्व का केंद्रीय भाव बनी रहती है।

आस्था, तपस्या और संतान के लिए प्रार्थना का पर्व

जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं की आस्था और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। दिनभर निर्जला उपवास, शाम की पूजा और जिउतिया माता की कथा के माध्यम से महिलाएं अपनी संतानों के मंगल की कामना करती हैं। इस अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ मातृत्व की गहरी संवेदनाएं भी सामने आती हैं। इसी वजह से जितिया व्रत को संतान की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए समर्पित महत्वपूर्ण पर्व के रूप में देखा जाता है।

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