Kalashtami 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र और उग्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भैरव बाबा की पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी प्रकार के कष्ट, भय, शत्रुओं का नाश और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। आज यानी 3 अक्टूबर को कालाष्टमी का व्रत किया जा रहा है इस दिन शाम के वक्त पूजा करने का विधान है, आइए जानते हैं कालाष्टमी व्रत का महत्व और इसकी पूजा-विधि के बारे में विस्तार से।
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कालाष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक बार अहंकार वश ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया था। तब उनके बीच उत्पन्न भ्रम को दूर करने के लिए भगवान शिव ने अपनी माया से एक दिव्य ज्योति स्तंभ प्रकट किया और उसी समय शिव के अंश से काल भैरव की उत्पत्ति हुई। काल भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि जो भक्त कालाष्टमी के दिन विधि-विधान से बाबा भैरव की पूजा करते हैं, उनके जीवन से शनि और राहु-केतु के बुरे प्रभाव या कुंडली के दोष समाप्त हो जाते हैं। यह व्रत जीवन में अनुशासन, साहस और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से रात्रि के समय काल भैरव की पूजा का विधान है, क्योंकि उन्हें तंत्र साधना और रात्रि के देवताओं में प्रमुख माना गया है।
पूजा-विधि और नियम

कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और काल भैरव की एक साथ पूजा की जाती है। संध्याकाल या रात्रि के समय भैरव मंदिर जाकर या घर पर ही बाबा की चौकी सजाकर उनकी उपासना करें।

पूजा के दौरान भैरव बाबा को सिंदूर, सरसों का तेल, काले तिल, उड़द की दाल, फूल और उनके प्रिय भोग जैसे कि मालपुआ या मीठी रोटी अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें और चालीसा का पाठ करें। अंत में उनकी आरती उतारकर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें। इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है, क्योंकि कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन है।
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