Pakistan Iran Land Routes : वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका एक बार फिर संदेह के घेरे में है। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ वैश्विक मंच पर खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक शांतिदूत और मुख्य मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस्लामाबाद पर वॉशिंगटन की पीठ में छुरा घोंपने के आरोप लग रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरान को रूस, चीन और अन्य मित्र देशों के साथ व्यापार जारी रखने के लिए जमीन के रास्ते 6 नए मार्ग उपलब्ध कराए हैं। इस कदम को अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और नाकेबंदी को विफल करने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति को पाकिस्तान से खतरा
अमेरिका के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डेरेक जे. ग्रॉसमैन ने इस घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान द्वारा ईरान को ये जमीनी गलियारे देना सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अधिकतम आर्थिक दबाव’ (Maximum Pressure Strategy) की नीति पर प्रहार है। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी कर तेहरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना था, ताकि उसे बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, पाकिस्तान के इन वैकल्पिक रास्तों ने ईरान को अपने तेल और अन्य संसाधनों का व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रखने की संजीवनी दे दी है।
सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार: ‘इस्लामाबाद ने खेला दोहरा खेल’
डेरेक ग्रॉसमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्रंप प्रशासन को आगाह करते हुए लिखा कि अमेरिका का “तथाकथित दोस्त” पाकिस्तान एक खतरनाक खेल खेल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये छह नए जमीनी मार्ग ईरान को ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नाकेबंदी के प्रभाव से बचने में मदद करेंगे। ग्रॉसमैन के अनुसार, यह कदम न केवल ईरान को अमेरिकी दबाव के विरुद्ध खड़े रहने की शक्ति देता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि इस्लामाबाद अपनी पुरानी आदतों के मुताबिक एक बार फिर “डबल गेम” खेल रहा है। इससे अमेरिका की पूरी कूटनीतिक और सैन्य घेराबंदी कमजोर पड़ती दिख रही है।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर अंतरराष्ट्रीय सवाल
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर इजरायल, ने पहले ही पाकिस्तान को एक “अविश्वसनीय खिलाड़ी” करार दिया है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पाकिस्तान में एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनने की क्षमता और ईमानदारी दोनों की कमी है। उनके अनुसार, जिस देश का इतिहास ही दोहरे मापदंडों पर टिका हो, वह दो परमाणु शक्तियों या बड़े देशों के बीच निष्पक्ष सुलह नहीं करा सकता। पाकिस्तान की हालिया हरकतों ने इन दावों को और मजबूती दी है।
ईरान का अविश्वास: ‘पाकिस्तान भरोसेमंद दोस्त तो है, पर निष्पक्ष नहीं’
हैरानी की बात यह है कि जिस ईरान की मदद के लिए पाकिस्तान ने ये रास्ते खोले हैं, वह खुद भी इस्लामाबाद पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहा है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि पाकिस्तान तेहरान का मित्र हो सकता है, लेकिन वह एक उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की नीतियां हमेशा अमेरिकी हितों की ओर झुकी रहती हैं। ऐसे में पाकिस्तान अब एक ऐसी स्थिति में फंस गया है जहाँ न तो अमेरिका उस पर भरोसा कर रहा है और न ही ईरान उसे एक निष्पक्ष पक्ष मान रहा है।
ट्रंप की नाकेबंदी और पाकिस्तान की सेंधमारी का परिणाम
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि वे ईरानी बंदरगाहों की ऐसी सख्त घेराबंदी करें कि तेहरान आर्थिक रूप से पंगु हो जाए। ट्रंप का मानना है कि इस दबाव से जंग को उनकी शर्तों पर खत्म किया जा सकता है। लेकिन पाकिस्तान द्वारा दिए गए ये 6 जमीनी रास्ते ट्रंप के इस चक्रव्यूह को तोड़ने का काम कर रहे हैं। यदि ईरान इन रास्तों से रूस और चीन के साथ अपना व्यापार सुचारू रखता है, तो अमेरिका के प्रतिबंधों का असर न्यूनतम हो जाएगा। अब देखना यह है कि वॉशिंगटन पाकिस्तान की इस “सेंधमारी” पर क्या कड़ी प्रतिक्रिया देता है।
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