Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले की जांच अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। एन.आई.ए. (NIA) की अब तक की जांच में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जो सीधे तौर पर इस हमले के तार पाकिस्तान से जोड़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहलगाम हमले में बरामद मोबाइल फोनों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच से पता चला है कि उनमें से एक फोन पाकिस्तान में आयात की गई एक विशेष खेप का हिस्सा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस खेप का वित्तपोषण (Funding) कराची स्थित एक ऐसे बैंक ने किया था, जिसका नाम पहले भी वैश्विक आतंकवाद से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामलों में सामने आता रहा है।
हमले में 26 लोगों की जान गई थी
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें बड़ी संख्या में हिंदू पर्यटक शामिल थे। इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों में भारी गिरावट देखी गई। भारत ने इस बर्बर हमले के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था, हालांकि इस्लामाबाद ने हमेशा की तरह आरोपों को सिरे से नकार दिया। इस हमले के बाद उपजे तनाव ने सीमा पर चार दिनों तक भारी मोर्टार फायरिंग, ड्रोन गतिविधियों और हवाई हमले जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर दी थी, जिसने दोनों देशों को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया था।
ऑप्रेशन महादेव और बरामद मोबाइल से खुला आतंकियों का नेटवर्क
सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के पास दाचीगाम में एक सफल ‘ऑप्रेशन महादेव’ के दौरान तीन कुख्यात आतंकियों—सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिबरान और हमजा अफगानी—को मार गिराया था। मुठभेड़ स्थल से मिले दो मोबाइल फोन जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए हैं। एन.आई.ए. ने जब इन शाओमी रेडमी सीरीज के फोनों के आई.एम.ई.आई. (IMEI) नंबरों के जरिए कंपनी से संपर्क किया, तो सप्लाई हिस्ट्री ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। एक फोन (रेडमी 9टी) जनवरी 2021 में पाकिस्तान पहुंची एक खेप का हिस्सा था, जिसे कराची की ‘टेक सिराट प्राइवेट लिमिटेड’ ने आयात किया था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इन डिवाइस की लॉजिस्टिक्स और फंडिंग सीधे कराची स्थित एक बैंक मुख्यालय से जुड़ी थी।
आतंकी सप्लाई चेन का खात्मा
अब सुरक्षा एजेंसियां केवल आतंकियों को मार गिराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके ‘सप्लाई चेन’ (Supply Chain) को तोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। जांच का दायरा अब यह पता लगाने पर है कि पाकिस्तान में बैठे कौन से तत्व इन आतंकवादियों को तकनीकी मदद और साजो-सामान मुहैया करा रहे थे। एन.आई.ए. अब उस बड़े नेटवर्क को खंगाल रही है जो सीमा पार से कश्मीर में हिंसा भड़काने के लिए तकनीक और फंडिंग का इस्तेमाल कर रहा है। यह जांच भविष्य के आतंकी मंसूबों को नाकाम करने और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के तंत्र को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।










