Padma Awards 2026: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है। सोमवार (25 मई, 2026) को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में एक भव्य अलंकरण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, देश की कई अन्य महान और गणमान्य विभूतियों के साथ-साथ भगत सिंह कोश्यारी को भी राष्ट्र के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से नवाजेंगी।
यह पुरस्कार उनके दशकों लंबे सार्वजनिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन में राष्ट्र निर्माण के लिए दिए गए अभूतपूर्व योगदान का एक बड़ा सम्मान है।
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‘भगत दा’ का प्रारंभिक जीवन
उत्तराखंड और देश की सियासत में ‘भगत दा’ के नाम से बेहद लोकप्रिय भगत सिंह कोश्यारी केवल एक मंझे हुए राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, प्रखर पत्रकार और समर्पित राष्ट्रवादी नेता भी रहे हैं। वर्ष 1966 में उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह से देश सेवा और शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। इसी संकल्प के तहत उन्होंने उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की, जिसने क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाई।
उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और विभाग कार्यवाह के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही उन्होंने पिथौरागढ़ से एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र का सफल प्रकाशन और संपादन भी किया।
साल 1975 में देश में आपातकाल (Emergency) लागू होने के दौरान उन्होंने मुखर होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, जिसके चलते उन्हें दमनकारी ‘मीसा’ (MISA) कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया था।
उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक
भगत सिंह कोश्यारी का संसदीय और विधायी करियर बेहद शानदार रहा है। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय साल 1997 में उन्हें पहली बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के सदस्य के रूप में नामित किया गया था।
उत्तराखंड के विकास में भूमिका
साल 2000 में जब पृथक उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, तो वहां बनी अंतरिम सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद, अपनी प्रशासनिक कुशलता के चलते वह राज्य (तब उत्तरांचल) के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में भी जनता की आवाज को मजबूती से बुलंद किया।
राज्य की राजनीति के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया। वर्ष 2008 में वह उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए चुने गए। इसके बाद, साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट से भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और संसद पहुंचे।
राजभवन का कार्यकाल
राष्ट्रीय राजनीति में लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें संवैधानिक पदों पर बड़ी जिम्मेदारी दी। 5 सितंबर, 2019 को भगत सिंह कोश्यारी को देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक, महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। महाराष्ट्र के राजभवन में उनके कार्यकाल के दौरान कई बड़े सियासी घटनाक्रम देखने को मिले। इसके बाद, अगस्त 2020 में उनकी प्रशासनिक क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। आज राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाला ‘पद्मभूषण’ उनके इसी देशव्यापी और बेदाग सार्वजनिक जीवन को एक बड़ी राष्ट्रीय पहचान दे रहा है।
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