UP Politics: ओवैसी के इस मास्टरस्ट्रोक से उड़े अखिलेश यादव के होश, यूपी में बनेगा नया सियासी गठबंधन

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच बयानों के तीर बेहद तीखे हो गए हैं। एआईएमआईएम (AIMIM) को भाजपा की 'बी टीम' कहे जाने पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी ने सपा प्रमुख पर करारा पलटवार किया है। ओवैसी अब यूपी में छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक नया मजबूत मोर्चा तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 15, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश के सियासी दंगल में बयानों के तीर बेहद तीखे होते जा रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को भारतीय जनता पार्टी की ‘बी टीम’ कहे जाने पर भड़के पार्टी सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे करारा हमला बोला है। ओवैसी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राजनैतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव की रणनीतिक समझ पर गंभीर सवाल उठाए। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कल तक धर्मनिरपेक्षता की बड़ी-बड़ी बातें करते थे, वे आज खुद पाला बदल रहे हैं। इस तीखे वार-पलटवार से सूबे की राजनीति में गरमाहट आ गई है।

ओवैसी ने अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति को बताया खोखला

बताते चले कि, असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को पुरानी यादें ताजा कराते हुए आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद को बहुत बड़ा रणनीतिकार समझते हैं और पश्चिम बंगाल के चुनावों में ममता बनर्जी के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे थे। ओवैसी ने सीधे शब्दों में पूछा कि अखिलेश बाबू, आप जिस तृणमूल कांग्रेस की पैरवी करने बंगाल गए थे, आज उसी पार्टी के कई दिग्गज अपनी ही मुखिया का साथ छोड़कर भाजपा के खेमे में शामिल होने को तैयार बैठे हैं। ऐसे में दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अखिलेश को अपने राजनैतिक सहयोगियों के खोखलेपन को देखना चाहिए।

यूपी में तीसरे मोर्चे की तैयारी

इस तीखे वार-पलटवार के बीच उत्तर प्रदेश की आगामी राजनैतिक दिशा को लेकर भी बड़े संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। असदुद्दीन ओवैसी केवल बयानों तक सीमित नहीं रहने वाले हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में एक बहुत बड़ा और मजबूत मोर्चा तैयार करने की योजना बना रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, एआईएमआईएम सूबे के भीतर कई छोटे और असरदार क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक नया चुनावी विकल्प (Alternative Front) बनाने जा रही है। ओवैसी का यह नया दांव सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने का काम करेगा।

सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी से बदलेगा यूपी का सियासी समीकरण

ओवैसी की इस नई घेराबंदी से उत्तर प्रदेश के आने वाले चुनावों में मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प होने की पूरी उम्मीद है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ओवैसी छोटे दलों को एकजुट करने में कामयाब रहते हैं, तो इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी के कोर वोट बैंक को हो सकता है। जहाँ एक तरफ भाजपा अपनी तैयारियों को मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सपा और एआईएमआईएम के बीच की यह आपसी जंग विपक्ष के वोटों का बिखराव तय करेगी, जिससे आगामी चुनावी समर बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।