UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरणों और राजनीतिक पहुंच को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। 21 सितंबर को गोरखपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रवि किशन ने विपक्ष की ब्राह्मण और ओबीसी पहुंच की रणनीति पर सवाल उठाए और दावा किया कि 2027 के चुनाव में सपा-कांग्रेस को बड़ा नुकसान होगा।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर रवि किशन का हमला

बताते चले कि, ओबीसी से जुड़े कानून और विपक्ष की चुनावी रणनीति पर सवाल पूछे जाने पर रवि किशन ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे कितने भी राजनीतिक दांव आजमा ले, जनता को प्रभावित करना आसान नहीं है। रवि किशन ने विपक्ष की ब्राह्मणों तक पहुंच को लेकर ‘P’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ‘P’ से पंडित नहीं, बल्कि परिवारवाद होता है। उनके इस बयान को समाजवादी पार्टी की पीडीए राजनीति और ब्राह्मण आउटरीच पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया।
ब्राह्मण वोट बैंक नहीं, रवि किशन ने गिनाई समुदाय की भूमिका
रवि किशन ने कहा कि ब्राह्मण समाज को महज वोट बैंक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह ऐसा समाज है, जिसकी पहचान त्याग, ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी रही है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या राजनीतिक दल यह मानते हैं कि ब्राह्मणों को आसानी से बहलाया या फुसलाया जा सकता है। रवि किशन ने कहा कि राजनीतिक दलों को पहले ब्राह्मण समाज के इतिहास और उसकी सामाजिक भूमिका को समझना चाहिए।
2027 यूपी चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस पर बड़ा दावा

बीजेपी सांसद ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि दोनों दल चुनाव में बुरी तरह हारेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिशें इस बात का संकेत हैं कि वे चुनावी चुनौती को लेकर चिंतित हैं। रवि किशन ने कहा कि बीजेपी का ध्यान विपक्ष की रणनीति पर नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने और 2017 के प्रदर्शन से आगे जाने की तैयारी पर है। हालांकि 2027 का चुनाव अभी हुआ नहीं है, इसलिए हार-जीत को लेकर उनके बयान को राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए।
विपक्षी बयानबाजी और एआई वीडियो पर भी रवि किशन का निशाना
रवि किशन ने विपक्ष की ओर से सामने आने वाले बयानों और कथित एआई वीडियो को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक दलों के बीच एक-दूसरे पर हमले बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष की ओर से जारी ऐसी सामग्री और बयानबाजी राजनीतिक असहमति को और तेज कर रही है। उन्होंने इसे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा बताया और कहा कि बीजेपी का फोकस संगठन तथा चुनावी तैयारी पर बना हुआ है।
राहुल गांधी की मिमिक्री और राजनीतिक भाषा पर भी सवाल

रवि किशन ने राहुल गांधी से जुड़े हालिया विवाद का जिक्र करते हुए राजनीतिक भाषा के स्तर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को लेकर की गई टिप्पणी और उनकी मिमिक्री पर आपत्ति जताई। रवि किशन ने इसे राजनीति के गिरते स्तर से जोड़ते हुए कहा कि जब विपक्ष के पास सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाने के पर्याप्त मुद्दे नहीं होते, तब व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा लिया जाता है। यह रवि किशन की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जबकि इस मुद्दे पर विपक्ष और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
हामिद अंसारी के बयान पर रवि किशन की प्रतिक्रिया

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हालिया बयान पर भी रवि किशन ने प्रतिक्रिया दी। अंसारी ने एक कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू के पुराने कथन का हवाला देते हुए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के लिए गंभीर खतरा बताया था। इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं और अन्य राजनीतिक हलकों से प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
पूर्व उपराष्ट्रपति से संयम बरतने की अपील
रवि किशन ने हामिद अंसारी की आलोचना करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक देश के संवैधानिक पद पर रहे हैं और इसलिए उनके सार्वजनिक बयानों को लोग गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने अंसारी से ऐसे बयान नहीं देने की अपील की, जिससे किसी समुदाय या समाज के लोगों को ठेस पहुंचने की धारणा बने। हामिद अंसारी के बयान को लेकर बीजेपी और विपक्षी खेमों के बीच राजनीतिक बहस फिलहाल जारी है।
2027 से पहले यूपी की सियासत में बढ़ी बयानबाजी
रवि किशन के इन बयानों के साथ उत्तर प्रदेश की 2027 चुनावी राजनीति में ब्राह्मण, ओबीसी और पीडीए जैसे सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बहस और तेज होती दिखाई दे रही है। बीजेपी सांसद ने जहां विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए, वहीं अपना फोकस बीजेपी के संगठन और चुनावी तैयारी पर बताया। 2027 विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी भविष्य में हैं, इसलिए फिलहाल अलग-अलग दलों के नेताओं के दावों को उनके राजनीतिक रुख और चुनावी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।










