Operation Trashi-1: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू इलाके में रविवार सुबह सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हुई। खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी की थी। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जवाबी कार्रवाई में अब तक एक आतंकवादी को ढेर कर दिया गया है। सुरक्षाबलों का यह ऑपरेशन अभी भी जारी है और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है ताकि कोई भी संदिग्ध भाग न सके।
जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना
सुरक्षा एजेंसियों को यह इनपुट मिला था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के 2 से 3 आतंकवादी इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षाबल आतंकियों के ठिकाने के करीब पहुंचे, आतंकवादियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए प्रभावी ढंग से जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक आतंकी मारा गया।
‘ऑपरेशन किया’: उधमपुर की गुफा में आतंकियों का खात्मा
इससे पहले 4 फरवरी को उधमपुर और किश्तवाड़ की सीमाओं पर एक बड़ा अभियान चलाया गया था, जिसे ‘ऑपरेशन किया’ (Operation Kiya) नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में व्हाइट नाइट कोर (CIF डेल्टा), जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के जवान शामिल थे। 3 फरवरी की शाम को शुरू हुई इस मुठभेड़ में आतंकी सुरक्षाबलों पर फायरिंग करते हुए एक प्राकृतिक गुफा के अंदर जा छिपे थे। अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क जवानों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया।
ग्रेनेड लॉन्चर के इस्तेमाल से आतंकियों के ठिकाने ध्वस्त
4 फरवरी की सुबह जब आतंकियों ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया, तो सुरक्षाबलों ने रणनीतिक रूप से अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGLs) का उपयोग किया। भारी विस्फोट के कारण गुफा का एक हिस्सा ढह गया, जिसमें छिपे हुए जैश-ए-मोहम्मद के दो खूंखार आतंकवादी मारे गए। यह ऑपरेशन रणनीतिक दृष्टि से बेहद सफल रहा क्योंकि इसमें आधुनिक हथियारों का उपयोग कर आतंकियों को उनके सुरक्षित ठिकाने के भीतर ही ढेर कर दिया गया।
ऑपरेशन ‘त्राशी-1’: 15 दिनों से जारी सैन्य कार्रवाई
किश्तवाड़ जिले में ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ पिछले कई दिनों से निरंतर चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 18 जनवरी को चतरू बेल्ट के मंडराल-सिंहपोरा के पास स्थित सोनार गांव के घने जंगलों में हुई थी। पिछले 15 दिनों के भीतर इस क्षेत्र में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच चार बार आमना-सामना हो चुका है। घने जंगल और अत्यधिक ठंड के बावजूद भारतीय जवान आतंकियों की तलाश में चप्पा-चप्पा छान रहे हैं।
हवलदार गजेंद्र सिंह का सर्वोच्च बलिदान और वर्तमान स्थिति
इस लंबे समय से चल रहे अभियान में भारतीय सेना को क्षति भी उठानी पड़ी है। 18 जनवरी को हुई पहली मुठभेड़ के दौरान सेना के 8 जवान घायल हुए थे। दुर्भाग्यवश, उपचार के दौरान वीर हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए। इसके बाद भी सेना का मनोबल नहीं टूटा और 22, 24 तथा 31 जनवरी को डोलगाम और आसपास के इलाकों में लगातार मुठभेड़ जारी रही। वर्तमान में भी किश्तवाड़ और उधमपुर के जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि घाटी को आतंकवाद मुक्त किया जा सके।









