Operation Eastern Reach : ऑपरेशन ईस्टर्न रीच में बड़ी सफलता, मोल्दोवा से गैंगस्टर अमृतपाल भारत लाया गया

ऑपरेशन ईस्टर्न रीच में बड़ी कामयाबी के बाद मोल्दोवा से गैंगस्टर अमृतपाल को भारत लाया गया। विदेश में उसकी मौजूदगी, गिरफ्तारी और भारत वापसी से जुड़ी कार्रवाई ने कई सवाल खड़े किए हैं। आखिर अमृतपाल तक एजेंसियां कैसे पहुंचीं और इस पूरे ऑपरेशन में कौन-कौन से अहम मोड़ आए?

Operation Eastern Reach

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 12, 2026

Operation Eastern Reach :  पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। ‘ऑपरेशन ईस्टर्न रीच’ के तहत कुख्यात गैंगस्टर अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को मोल्दोवा से भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है। पंजाब पुलिस के अनुसार, यूरोप के किसी देश से किसी गैंगस्टर का यह पहला सफल प्रत्यर्पण है। कार्रवाई को AGTF और OFTEC टीम ने केंद्रीय एजेंसियों तथा विदेशी जांच और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से अंजाम दिया।

जग्गू भगवानपुरिया का प्रमुख हिटमैन था अमृतपाल

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के लिए मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था। उसके खिलाफ पंजाब के अलग-अलग जिलों में कुल 21 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें चार मामलों में अदालत में मुकदमे की कार्यवाही चल रही है, जबकि 17 मामलों की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में हत्या के पांच, आर्म्स एक्ट के नौ और एनडीपीएस एक्ट से जुड़ा एक मामला शामिल है। इसके अलावा यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत भी मामले दर्ज हैं।

कई जिलों में दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले

अमृतपाल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का दायरा पंजाब के कई जिलों तक फैला हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड में बटाला, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर और लुधियाना जैसे स्थानों से जुड़े मामले सामने आए हैं। इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थीं। विदेश भागने के बाद भी उसके संभावित ठिकानों और गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा।

फर्जी पहचान और पासपोर्ट से भारत से हुआ फरार

जांच के अनुसार, अमृतपाल सिंह अक्टूबर 2024 के अंतिम सप्ताह में फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर भारत से फरार हुआ था। बताया गया है कि उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया, जिसमें उसका नाम ‘गुरपाल सिंह’ दर्ज था। भारत से निकलने के बाद वह पहले संयुक्त अरब अमीरात पहुंचा और इसके बाद कई देशों से गुजरते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। पंजाब पुलिस ने उसके फर्जी दस्तावेजों और संभावित ठिकानों से संबंधित जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की।

रेड कॉर्नर नोटिस के बाद बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव

अमृतपाल के विदेश भागने के बाद उसकी तलाश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया गया। उपलब्ध जानकारी और जांच के आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ। पंजाब पुलिस की कोशिश थी कि आरोपी की लोकेशन का पता लगाकर उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत वापस लाया जाए। इसी समन्वित प्रयास के बाद मोल्दोवा में उसकी गिरफ्तारी संभव हुई।

यूक्रेन जाने की कोशिश में मोल्दोवा में गिरफ्तारी

मोल्दोवा के अधिकारियों ने अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, उस समय वह ओटासी स्टेट बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से यूक्रेन में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसके भारत प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। इस प्रक्रिया के दौरान मोल्दोवा की अदालत में प्रत्यर्पण से संबंधित सुनवाई चली और करीब छह महीने तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ती रही।

अदालत से प्रत्यर्पण की मिली मंजूरी

मोल्दोवा की अदालत ने 26 मई 2026 को अमृतपाल सिंह के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी। बाद में अपील अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। कानूनी अड़चनें दूर होने के बाद पंजाब पुलिस ने उसे भारत लाने की तैयारी तेज कर दी। इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय एजेंसियों और मोल्दोवा के संबंधित अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय किया गया।

11 सितंबर को भारत लेकर पहुंची विशेष टीम

कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय विशेष टीम मोल्दोवा की राजधानी चिशिनाउ पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया। इसके बाद उसे अजरबैजान की राजधानी बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया। पुलिस टीम के साथ वह नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचा, जहां प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई।

पंजाब पुलिस के लिए बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि

अमृतपाल सिंह का प्रत्यर्पण पंजाब पुलिस की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इस अभियान में राज्य पुलिस के साथ केंद्रीय और विदेशी एजेंसियों के बीच समन्वय अहम रहा। ‘ऑपरेशन ईस्टर्न रीच’ के जरिए पुलिस ने विदेश में छिपे आरोपी तक पहुंच बनाने, कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने और उसे भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। अब उसके खिलाफ दर्ज मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई भारतीय अदालतों में होगी।

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