आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश के लिए उपयुक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "कर्मयोगी बनें" की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला

Wrriten By :

Editor

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

भोपाल.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "कर्मयोगी बनें" की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम "कर्म योगी शिक्षाविद्" की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बजट को 5 वर्ष में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध रूप से पांच लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हर वर्ष एक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बद्ध 16 विभागों के लक्ष्य समग्र रूप से तय किए गए हैं। इससे किसान की आय को दोगुना करने का राज्य सरकार का संकल्प भी पूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें सहकर्मी संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। हमने "अभ्युदय मध्यप्रदेश" का जो संकल्प लिया है, उसमें शिक्षा केंद्रीय भूमिका निभाती है। हम यदि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें विकसित विश्वविद्यालयों का निर्माण करना होगा। मध्यप्रदेश को मूल्य आधारित, गुणवत्ता संपन्न और रोजगार सक्षम शिक्षा का मॉडल राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। 'कर्मयोगी बने' कार्यशाला इसी दिशा में एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रो. आर. बालासुब्रमणियम, जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति प्रो. शांति धुलिपुडी पंडित, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।

 

Leave a Comment

2