Odisha Vigilance Raid: ओडिशा के कंधमाल जिले के बालीगुडा से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के सतर्कता विभाग (विजिलेंस डिपार्टमेंट) ने शनिवार (6 जून, 2026) को इंटीग्रिटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) में तैनात असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) बैकुंठ नाथ बेहरा के खिलाफ एक साथ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इंजीनियर बेहरा के खिलाफ लंबे समय से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। इन पुख्ता आरोपों के आधार पर विजिलेंस की विशेष टीमों ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत बेहरा से जुड़े कुल 9 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ धावा बोला, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया।
छापेमारी में खुला कुबेर का खजाना
जैसे-जैसे सतर्कता विभाग की यह तलाशी अभियान आगे बढ़ा, वैसे-वैसे अधिकारी आरोपी इंजीनियर की काली कमाई को देखकर दंग रह गए। छापेमारी के दौरान अब तक की जांच में बैकुंठ नाथ बेहरा के पास करोड़ों रुपये की बेहिसाब प्रॉपर्टी का खुलासा हुआ है। विजिलेंस की टीम को तलाशी के दौरान इंजीनियर के पास से एक आलीशान पांच मंजिला इमारत और विभिन्न प्रमुख शहरों में स्थित 13 अत्यंत महंगे कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा, जब बेहरा के दो बैंक लॉकरों को खोला गया, तो वहां से 2 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी (कैश) और 300 ग्राम से अधिक के सोने के जेवरात बरामद किए गए।
पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड थे लॉकर
विजिलेंस विभाग के आला अधिकारियों ने जब आरोपी इंजीनियर बैकुंठ नाथ बेहरा के बैंक लॉकर को खोला, तो उसके अंदर ठंसकर भरी गईं नोटों की गड्डियां देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। लॉकर से इतनी भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई कि अधिकारियों के लिए उन्हें हाथों से गिनना असंभव हो गया। इसके बाद आनन-फानन में बैंक से विशेष कैश काउंटिंग मशीनें मंगवाई गईं, ताकि बरामद रकम की सटीक गिनती की जा सके। विजिलेंस के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये दोनों बैंक लॉकर आरोपी इंजीनियर ने अपनी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड करवा रखे थे, ताकि किसी को भनक न लग सके।
भव्य इमारतें और आलीशान संपत्तियां
ओडिशा सतर्कता विभाग द्वारा अब तक की गई संपत्तियों के मूल्यांकन में बेहरा के साम्राज्य का बड़ा ब्यौरा सामने आया है। आरोपी के पास कुल पांच बड़ी इमारतें हैं, जिनमें से चार अकेले राज्य की राजधानी भुवनेश्वर के सबसे महंगे और पॉश इलाकों में स्थित हैं। इनमें नीलाद्रि विहार में 10,500 वर्ग फुट में फैली एक विशाल चार मंजिला इमारत, शैलश्री विहार में 1,100 वर्ग फुट की तीन मंजिला इमारत, कानन विहार में 3,750 वर्ग फुट की दो मंजिला इमारत और चंद्रशेखरपुर में 2,500 वर्ग फुट की दो मंजिला इमारत शामिल है। इसके अलावा, जाजपुर के धर्मशाला में उनकी पैतृक जमीन पर भी 2,500 वर्ग फुट की एक और भव्य दो मंजिला इमारत बनी हुई पाई गई है।
प्रमुख शहरों में खरीदे गए 13 महंगे प्लॉट
इमारतों के अलावा, इंजीनियर बेहरा ने जमीनों में भी अपनी काली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा निवेश किया था। विजिलेंस को मिले दस्तावेजों के अनुसार, उनके नाम पर कुल 13 बेशकीमती प्लॉट रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 7 सबसे महंगे प्लॉट भुवनेश्वर के प्राइम लोकेशंस जैसे चंद्रशेखरपुर, शैलश्री विहार, घटिकिया और बोमीखाल में खरीदे गए थे। इसके साथ ही, जाजपुर जिले के धर्मशाला क्षेत्र में 5 प्लॉट और बारीपदा में एक बड़े प्लॉट का मालिकाना हक भी इसी भ्रष्ट इंजीनियर के पास पाया गया है, जिनकी वर्तमान बाजार कीमत कई करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
27 सालों में बनाया भ्रष्टाचार का साम्राज्य
उल्लेखनीय है कि 52 वर्षीय आरोपी बैकुंठ नाथ बेहरा ने साल 1999 में एक बेहद साधारण जूनियर इंजीनियर के तौर पर ओडिशा सरकार की सेवा में अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय उनकी शुरुआती मासिक सैलरी महज 6,000 रुपये थी। इसके बाद साल 2016 में उन्हें प्रमोट करके असिस्टेंट इंजीनियर बनाया गया। हाल ही में, फरवरी 2026 में उन्हें असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) के पद पर पदोन्नति मिली थी, जिसके बाद वे बालीगुडा स्थित आईटीडीए (ITDA) कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे। विजिलेंस अब उनकी पूरी नौकरी के दौरान हुई कमाई और इस अकूत संपत्ति के बीच के अंतर की बारीकी से कानूनी जांच कर रही है।
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