Odisha Textbook Row: ओडिशा कक्षा-1 की किताब में बड़ी गलती, ‘वंदे उत्कल जननी’ और राष्ट्रगान के शब्द गलत छपे

ओडिशा की कक्षा-1 की एक पाठ्यपुस्तक में राष्ट्रगान और 'वंदे उत्कल जननी' के शब्द गलत छपने का मामला सामने आया है। इस गलती के बाद शिक्षा विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर यह चूक कैसे हुई, किसकी जिम्मेदारी तय होगी और आगे क्या कार्रवाई होगी, जानिए पूरी खबर।

Odisha Textbook Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 5, 2026

Odisha Textbook Row:  ओडिशा में नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों में लगातार सामने आ रही त्रुटियों का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अब कक्षा-1 के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई ‘झूलना-1’ नामक पुस्तक में कई गंभीर गलतियां सामने आई हैं। इन त्रुटियों के उजागर होने के बाद शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भाषा और शब्दों की शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि शुरुआती स्तर पर ही गलत सामग्री पढ़ाई जाएगी, तो बच्चों की भाषा सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और वे गलत शब्दों को सही मानकर सीख सकते हैं।

राज्य गीत में शब्द छूटने पर उठे सवाल

किताब में सबसे प्रमुख त्रुटि ओडिशा के राज्य गीत ‘वंदे उत्कल जननी’ से संबंधित बताई गई है। जानकारी के अनुसार, गीत की पंक्ति “घन घन बनभूमि” को पुस्तक में “घन बनभूमि” के रूप में प्रकाशित किया गया है। यानी मूल पंक्ति का एक महत्वपूर्ण शब्द पुस्तक से गायब है। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि राज्य गीत जैसी महत्वपूर्ण सामग्री में इस प्रकार की गलती गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। उनका मानना है कि ऐसी त्रुटियां विद्यार्थियों को गलत जानकारी दे सकती हैं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मूल पाठ की शुद्धता पर भी असर डाल सकती हैं।

राष्ट्रगान की वर्तनी में भी मिली त्रुटि

राज्य गीत के अलावा पुस्तक में राष्ट्रगान से जुड़े शब्दों की वर्तनी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुस्तक में “उत्कल” शब्द की सही वर्तनी के स्थान पर “उतलल” लिखा गया है। इस गलती ने पाठ्यपुस्तक की संपादन और प्रूफरीडिंग प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रगान और राज्य गीत जैसे महत्वपूर्ण विषयों में किसी भी प्रकार की त्रुटि स्वीकार्य नहीं मानी जा सकती और ऐसी पुस्तकों को प्रकाशित करने से पहले कई स्तरों पर जांच की जानी चाहिए।

डिजिटल पीडीएफ में भी मौजूद हैं गलतियां

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य के कई विद्यालयों तक इस पुस्तक की मुद्रित प्रतियां अभी तक नहीं पहुंची हैं। फिलहाल स्कूलों को पुस्तक का डिजिटल पीडीएफ संस्करण उपलब्ध कराया गया है, जिसे अभिभावकों के साथ भी साझा किया गया है। लेकिन अब यह सामने आया है कि पीडीएफ संस्करण में भी वही त्रुटियां मौजूद हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि पुस्तक को अंतिम रूप देने से पहले उसकी गुणवत्ता की पर्याप्त जांच क्यों नहीं की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल संस्करण में गलती होना यह दर्शाता है कि प्रकाशन से पहले संपादन प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है।

शिक्षकों और अभिभावकों ने की सुधार की मांग

किताब में लगातार सामने आ रही गलतियों को लेकर शिक्षक, अभिभावक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पुस्तक की व्यापक समीक्षा कर सभी त्रुटियों को जल्द से जल्द सुधारा जाए। साथ ही स्कूलों में केवल संशोधित और त्रुटिरहित पुस्तकें ही वितरित की जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। कई अभिभावकों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन से पहले विशेषज्ञों की समिति द्वारा विस्तृत जांच सुनिश्चित की जाए।

पहले भी सामने आ चुकी हैं हजारों त्रुटियां

यह पहला अवसर नहीं है जब ओडिशा की नई स्कूली पुस्तकों को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आई थीं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उन पुस्तकों में 1,600 से अधिक गलतियां दर्ज की गई थीं। उस समय भी विपक्षी दलों, शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। अब कक्षा-1 की पुस्तक में फिर से सामने आई नई गलतियों ने पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता, संपादन प्रक्रिया और शैक्षणिक सामग्री की निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की बुनियादी शिक्षा से जुड़े विषयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में सीखने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है, इसलिए समय रहते प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाना आवश्यक है।

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