अब आंखों की बीमारी पकड़ेगा एआई कैमरा, जेपी अस्पताल में शुरू हुई डायबिटिक रेटिनोपैथी की निशुल्क जांच

भोपाल राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) जिला चिकित्सालय में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की ''डायबिटिक रेटिनोपैथी'' (शुगर के कारण आंखों के पर्दे का खराब होना) की जांच निश्शुल्क की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अत्याधुनिक एआई फंडस कैमरा लगाया गया है। खास बात यह है कि यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई जाती है, तो मरीज को तत्काल बेहतर उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, निजी क्षेत्र में फंडस स्क्रीनिंग और रेटिनोपैथी की जांच पर दो से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आता है। जेपी अस्पताल में ''अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम'' के

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Published On :

जनवरी 26, 2026

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भोपाल
राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) जिला चिकित्सालय में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की ''डायबिटिक रेटिनोपैथी'' (शुगर के कारण आंखों के पर्दे का खराब होना) की जांच निश्शुल्क की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अत्याधुनिक एआई फंडस कैमरा लगाया गया है। खास बात यह है कि यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई जाती है, तो मरीज को तत्काल बेहतर उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, निजी क्षेत्र में फंडस स्क्रीनिंग और रेटिनोपैथी की जांच पर दो से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आता है।

जेपी अस्पताल में ''अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम'' के सहयोग से शुरू हुए इस केंद्र पर यह पूरी तरह निश्शुल्क होगी। केंद्र के शुभारंभ अवसर पर एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डा. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ मनीष शर्मा और सिविल सर्जन संजय जैन विशेष रूप से मौजूद रहे।

असंचारी रोग क्लीनिक से किया लिंक
इस नई जांच सुविधा को अस्पताल में पहले से संचालित ''असंचारी रोग क्लीनिक'' से जोड़ा गया है। 40 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनकी शुगर जांच के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर आंखों का परीक्षण किया जाएगा। डाॅक्टरों का कहना है कि शुगर के कारण आंखों के पर्दे पर खून के छींटे आ जाते हैं, जिससे दृष्टि स्थायी रूप से जा सकती है।

विजन जाने के बाद वापसी मुश्किल
सीएमएचओ डा. मनीष शर्मा ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी में शुरुआत में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। एक बार नजर चली जाए तो उसे वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए समय पर जांच ही एकमात्र बचाव है। इसका उपचार दवा या लेजर तकनीक से संभव है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
    अक्षर कटे हुए या तिरछे दिखाई देना।
    बारीक अक्षर पढ़ने में परेशानी होना।
    अचानक रोशनी की कमी महसूस होना या धुंधला दिखना।
    आंखों के सामने काले धब्बे या काली रेखाएं तैरती नजर आना।

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