Noida Voilence: नोएडा में हुई हालिया श्रमिक हिंसा और उपद्रव के मामले में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। ड्यूटी में लापरवाही और स्थिति को संभालने में विफल रहने के आरोप में नोएडा सेंट्रल के डीसीपी शैव्य गोयल और एसीपी उमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया गया है। इस प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही पुलिस ने हिंसा भड़काने के मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यूट्यूबर हिमांशु ठाकुर को गिरफ्तार किया है, जो श्रमिकों को भड़काने में शामिल बताया जा रहा है।
नोएडा पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
बताते चले कि, नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासनिक फेरबदल करते हुए नोएडा सेंट्रल जोन के शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिराई है। 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी शैव्या गोयल, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 को ही सेंट्रल नोएडा जोन और साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्हें महज 19 दिनों में हटा दिया गया। उनके स्थान पर अब डीसीपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार सिंह को सेंट्रल जोन का अतिरिक्त प्रभार और नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। शैलेंद्र सिंह अब यातायात प्रबंधन के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी भी करेंगे।
वेतन वृद्धि विरोध और श्रमिक हिंसा का सच
इस बड़ी कार्रवाई की जड़ 13 अप्रैल को हुई वह घटना है, जब हजारों श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग और औद्योगिक हड़ताल के नाम पर नोएडा की सड़कों पर भारी उपद्रव किया था। प्रदर्शनकारियों द्वारा आगजनी, पत्थरबाजी और सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ किए जाने से शहर की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसे भांपने और रोकने में स्थानीय पुलिस नेतृत्व पूरी तरह विफल साबित हुआ।
साजिशकर्ता हिमांशु ठाकुर की गिरफ्तारी
हिंसा मामले की जांच कर रही टीमों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस प्रवक्ता विजय कुमार गुप्ता के अनुसार, यूट्यूबर हिमांशु ठाकुर और मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद के बीच लगातार संपर्क के सबूत मिले हैं। जांच में पता चला है कि हिमांशु ठाकुर श्रमिकों को भड़काने और वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल उकसावा देने का काम कर रहा था। पुलिस का दावा है कि हिमांशु उच्च शिक्षित है और श्रमिकों की समस्याओं पर शोध कर रहा था, लेकिन वह ‘आकृति’ नाम की युवती के माध्यम से इस हिंसक संगठन से जुड़ा और दंगों की योजना में शामिल हो गया।
एसटीएफ और खुफिया एजेंसियों की जांच
नोएडा पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। एसटीएफ और खुफिया एजेंसियों द्वारा गहन पड़ताल की जा रही है ताकि हिंसा के पीछे के वित्तीय स्रोतों और अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने बताया कि इस मामले में आदित्य आनंद सहित अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेशी और पुलिस रिमांड के लिए ले जाया जाएगा। कमिश्नरेट का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से हिंसा के पीछे छिपे बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।









