Nipah Virus China Alert: भारत में निपाह के दस्तक के बाद चीन में हाई अलर्ट, हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग शुरू

भारत में निपाह वायरस के बढ़ते मामलों ने चीन को सतर्क कर दिया है। बीजिंग ने अपने सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर 'सर्च एंड स्क्रीन' अभियान शुरू किया है। क्या निपाह वायरस सीमाओं को पार कर वैश्विक संकट बन सकता है? जानें चीन के इस कड़े कदम के पीछे की असली वजह।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 29, 2026

Nipah Virus China Alert: भारत के कुछ हिस्सों में निपाह वायरस के मामले सामने आने के बाद अब पड़ोसी देश चीन में भी हड़कंप मच गया है। चीनी अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर अपने सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर उन देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है, जहाँ इस वायरस के प्रकोप की खबरें मिली हैं। बीजिंग पहुंचने वाले कई भारतीय यात्रियों ने साझा किया है कि हवाई अड्डों पर स्वास्थ्य अधिकारी संदिग्ध यात्रियों के स्वाब टेस्ट (Swab Test) कर रहे हैं। हालाँकि, चीनी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण एवं रोकथाम प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वर्तमान में चीन के भीतर निपाह वायरस का कोई भी पुष्ट मामला नहीं मिला है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से निगरानी को बढ़ा दिया गया है।

भारत के पश्चिम बंगाल में मिले मामलों पर चीन की नजर

चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने भारत की स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि वर्तमान प्रकोप मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल राज्य में देखा गया है। चूंकि पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति चीन के साथ सीधी भूमि सीमा साझा नहीं करती, इसलिए बीजिंग का मानना है कि इसका सीधा प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम हो सकता है। ‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश से आने वाले यात्रियों के माध्यम से संक्रमण के प्रवेश का जोखिम अभी भी बना हुआ है। इसी जोखिम को कम करने के लिए चीनी प्रशासन ने निगरानी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण और परीक्षण क्षमताओं में भारी निवेश किया है।

घातक मृत्यु दर और संक्रमण का तरीका

शेन्ज़ेन के थर्ड पीपुल्स हॉस्पिटल के प्रमुख लू होंग्झौ, जिन्होंने इस वायरस पर व्यापक शोध किया है, ने चेतावनी दी है कि निपाह वायरस की मृत्यु दर (Fatality Rate) बहुत अधिक है। यह एक जूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से ‘फ्रूट बैट्स’ (चमगादड़) से इंसानों में फैलता है। यह संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने, दूषित खजूर के रस या संक्रमित व्यक्ति की लार और मूत्र के संपर्क में आने से फैलता है। पर्यावरण में इस वायरस के जीवित रहने की क्षमता कम होने के कारण सामान्य जनता को जोखिम कम है, लेकिन अस्पताल और देखभाल केंद्रों में व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण का खतरा काफी अधिक रहता है।

प्रमुख लक्षण: श्वसन तंत्र और मस्तिष्क पर हमला

निपाह वायरस शरीर के श्वसन तंत्र और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना और चेतना के स्तर में गिरावट आना शामिल है। संक्रमण के संपर्क में आने के 3 से 14 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल में रिपोर्ट किए गए दो पुष्ट मामलों के बाद, एशियाई देशों में सतर्कता बरती जा रही है। थाईलैंड, नेपाल, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपने हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

इतिहास और उत्पत्ति: मलेशिया से शुरू हुआ सफर

निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998-1999 में मलेशिया में हुई थी, जहाँ यह सूअरों के माध्यम से मनुष्यों में फैला था। यह ‘पैरामिक्सोविरिडे’ (Paramyxoviridae) परिवार का सदस्य है। दक्षिण एशिया में, विशेष रूप से भारत और बांग्लादेश में, यह वायरस अक्सर दूषित फलों या संक्रमित चमगादड़ों द्वारा छोड़े गए अवशेषों के माध्यम से फैलता है। इस वायरस का कोई सटीक इलाज या टीका फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव और समय पर पहचान ही एकमात्र सुरक्षा कवच है। चीन का सख्त रुख दर्शाता है कि वह कोरोना काल के अनुभवों से सीख लेते हुए किसी भी नई महामारी के प्रति कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

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