निक जोनस का इमोशनल खुलासा: ‘मालती बैंगनी रंग की पैदा हुई थीं, प्रियंका अस्पताल में 12 घंटे रहती थीं

लॉस एंजिल्स सिंगर निक जोनास ने बताया है कि जन्म के बाद उनकी बेटी मालती मैरी चोपड़ा का वजन कम था और वह बहुत नाजुक थीं। जे शेट्टी पॉडकास्ट पर बात करते हुए प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस ने मालती की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत खुशी होती है कि अब उन्हें बेटी की खूबसूरती का अनुभव करने का मौका मिल रहा है। अपनी बेटी के बारे में बात करते हुए सिंगर की आंखों में आंसू आ गए। इकना ही नहीं, प्रियंका की बहन परिणीति चोपड़ा ने भी उन्हें बधाई दी थी और उनकी मिसाल

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Published On :

फ़रवरी 6, 2026

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लॉस एंजिल्स

सिंगर निक जोनास ने बताया है कि जन्म के बाद उनकी बेटी मालती मैरी चोपड़ा का वजन कम था और वह बहुत नाजुक थीं। जे शेट्टी पॉडकास्ट पर बात करते हुए प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस ने मालती की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत खुशी होती है कि अब उन्हें बेटी की खूबसूरती का अनुभव करने का मौका मिल रहा है। अपनी बेटी के बारे में बात करते हुए सिंगर की आंखों में आंसू आ गए। इकना ही नहीं, प्रियंका की बहन परिणीति चोपड़ा ने भी उन्हें बधाई दी थी और उनकी मिसाल भी दी।

निक जोनस ने मालती मैरी के जन्म के बाद अपने और प्रियंका के अनुभवों को शेयर किया। निक ने कहा, 'उसका जन्म बहुत ही कठिन परिस्थितियों में हुआ, जिनके बारे में मैंने पहले कभी बात नहीं की। हम उसके अप्रैल में आने की उम्मीद कर रहे थे, जिस साल वह पैदा हुई थी। फिर हमें फोन आया कि वह जल्दी आ जाएगी… हम अस्पताल पहुंचे और जब वह बाहर आई तो उसका वजन 1 पाउंड 11 औंस (765 ग्राम)था और उसका रंग लगभग बैंगनी था।' उन्होंने आगे बताया कि एनआईसीयू में नर्सों ने उसे कैसे पुनर्जीवित किया और उसकी देखभाल की।

प्रियंका और निक करते थे 12 घंटे की शिफ्ट
निक ने बताया कि मालती को घर लाने तक वह और प्रियंका हर दिन अस्पताल में 12-12 घंटे की शिफ्ट करते थे। निक ने कहा, यह कोविड-19 का दौर था, इसलिए मेरी पत्नी और मैंने साढ़े तीन महीने तक अस्पताल में 12-12 घंटे की शिफ्ट की। मुझे अभी भी उसकी गंध याद है। कुछ चीजें हमेशा दिल दहला देने वाली होती हैं। हर दिन वहां रहना और दूसरे परिवारों को ऐसी ही स्थिति से गुजरते देखना सुकून देने वाला और डरावना दोनों था। मालती ने साढ़े तीन महीने तक हर दिन संघर्ष किया और धीरे-धीरे उसका वजन बढ़ने लगा। छह बार खून चढ़ाने के बाद उसकी हालत में काफी सुधार हुआ। साढ़े तीन महीने बाद हम उसे घर ले आए।'

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