NHAI Toll Scam : NHAI टोल फर्जीवाड़े में ED का बड़ा एक्शन, 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर रेड

NHAI के टोल प्लाजा पर कथित फर्जीवाड़े की जांच में ED ने बड़ा एक्शन लिया है। सात राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर तलाशी जारी है। जांच एजेंसी अनधिकृत सॉफ्टवेयर, फर्जी टोल रसीदों और सरकारी हिसाब से बाहर रकम के कथित डायवर्जन का डिजिटल और वित्तीय ट्रेल तलाश रही है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 2, 2026

NHAI Toll Scam : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के विभिन्न टोल प्लाजा पर कथित फर्जी टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू की है। बुधवार, 2 सितंबर को जांच एजेंसी ने एक साथ कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में की जा रही है। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी संदिग्धों से जुड़े परिसरों की गहन तलाशी ले रही है।

PMLA के तहत सात क्षेत्रों में तलाशी अभियान

जानकारी के मुताबिक, ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA, 2002 के तहत यह कार्रवाई शुरू की है। बुधवार तड़के जांच अधिकारियों की अलग-अलग टीमें संदिग्ध परिसरों में पहुंचीं। तलाशी के दौरान दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एजेंसी को आशंका है कि टोल वसूली से प्राप्त रकम को कथित तौर पर आधिकारिक सिस्टम से बाहर निकालकर अवैध तरीके से दूसरी जगह भेजा गया।

अनधिकृत सॉफ्टवेयर से बनाई जा रही थीं फर्जी रसीदें

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, टोल प्लाजा पर कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी टोल रसीदें तैयार किए जाने का आरोप है। इसके अलावा टोल से मिलने वाली रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज किए बिना कथित तौर पर डायवर्ट किया जा रहा था। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।

फॉरेंसिक जांच में सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत

ED के मुताबिक, फॉरेंसिक जांच और NHAI के उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से संबंधित अहम जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसी डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाने में लगी है। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि कथित घोटाले से हासिल रकम कहां-कहां भेजी गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। साथ ही पैसों के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए मनी ट्रेल की जांच की जा रही है।

टोल संचालकों और IT कर्मचारियों की भूमिका पर नजर

जांच के दौरान टोल संचालकों, IT कर्मचारियों और कथित आरोपियों के बीच पैसों के लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। ED की टीमें डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही हैं। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं घोटाले की रकम को बेनामी संपत्तियों या अन्य माध्यमों से छिपाया तो नहीं गया। फर्जी FASTag के जरिए ओवरलोडेड और व्यावसायिक वाहनों को नियमों से बचाकर निकालने के आरोपों की भी जांच जारी है।

कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह पहले गिरफ्तार

इस मामले में वाराणसी से कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। आरोप है कि वह वाराणसी के हरहुआ इलाके में रहकर कथित अवैध नेटवर्क का संचालन कर रहा था। इसके अलावा वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब 62.87 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी के मामले की भी जांच चल रही है। देशभर में 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश के हैं।

UP STF और केंद्रीय एजेंसियों की भी जांच

टोल वसूली में कथित अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) और केंद्रीय जांच एजेंसियों की भी नजर कई टोल संचालकों पर है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन से लोग शामिल हैं। डिजिटल तकनीक के जरिए टोल राजस्व में हेरफेर किए जाने की आशंका के चलते इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जांच का अहम हिस्सा बने हुए हैं।

पिछले महीने भी 14 ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई

फर्जी टोल वसूली से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED इससे पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। पिछले महीने PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत जांच एजेंसी ने 14 ठिकानों पर तलाशी ली थी। उस समय भी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता में स्थित परिसरों को निशाना बनाया गया था। अब एक बार फिर व्यापक स्तर पर हुई छापेमारी से माना जा रहा है कि जांच एजेंसी कथित टोल घोटाले की जड़ों और पैसों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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