NGT Action: नर्मदा-क्षिप्रा-चंबल में गंदा पानी मिलने पर सख्ती, 352 नगर निकायों पर सवाल

मध्य प्रदेश में नदियों और जलस्रोतों में सीवेज पहुंचने के मामले में NGT ने सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट के अनुसार 413 नगरीय निकायों में 352 के पास सीवेज उपचार सुविधा नहीं है। करीब 637 MLD सीवेज 1,315 नालों के जरिए जलस्रोतों तक पहुंच रहा है। अब जमीनी सत्यापन और कार्रवाई पर नजर है।

NGT Action

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 26, 2026

NGT Action:  मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। नदियों में बिना पर्याप्त उपचार के सीवेज पहुंचने के मामले में ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। NGT ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब सरकार को यह बताना होगा कि नदियों में लगातार पहुंच रहे गंदे पानी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

352 नगर निकायों में STP की सुविधा नहीं

NGT के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के 352 नगर निकायों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण इन क्षेत्रों से निकलने वाले सीवेज के उचित उपचार की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। कई स्थानों पर घरेलू और शहरी गंदा पानी सीधे नदी तंत्र में पहुंच रहा है। ट्रिब्यूनल ने इतने बड़े स्तर पर सीवेज प्रबंधन की कमी को गंभीर मामला माना है और सरकार से प्रभावी समाधान की जानकारी मांगी है।

रोजाना 637 MLD सीवेज पहुंचने का दावा

मामले में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल नदियों में प्रतिदिन करीब 637 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) सीवेज पहुंच रहा है। यदि इस गंदे पानी का उचित उपचार नहीं किया जाता है, तो इसका सीधा असर नदी के जल की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। लगातार untreated sewage के नदी में मिलने से प्रदूषण का स्तर बढ़ने और प्राकृतिक जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

नदी की पारिस्थितिकी पर गंभीर असर

नदियों में लगातार सीवेज पहुंचने का असर केवल पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहता। इससे नदी में रहने वाले जलीय जीवों, वनस्पतियों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पानी में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ने से जलीय जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में नदियों के संरक्षण के लिए सीवेज के वैज्ञानिक उपचार और प्रभावी निगरानी की जरूरत बढ़ गई है।

लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता

नदियों का दूषित होना आसपास रहने वाली आबादी के लिए भी चिंता का विषय है। नदी के पानी का इस्तेमाल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करने वाले लोगों पर प्रदूषण का असर पड़ सकता है। पर्यावरण से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय तक गंदे पानी का नदी में प्रवाह जारी रहना गंभीर समस्या बन सकता है। इसलिए सीवेज को नदी में पहुंचने से पहले पूरी तरह उपचारित करना जरूरी है।

सरकार से पूछा गया प्रदूषण रोकने का प्लान

NGT ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। खास तौर पर उन नगर निकायों में सीवेज प्रबंधन की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं, जहां STP उपलब्ध नहीं हैं। सरकार को अपनी रिपोर्ट में मौजूदा व्यवस्था, सीवेज के निस्तारण और भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रस्तावित उपायों की जानकारी देनी होगी।

मुख्य सचिव को देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट

ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद अब मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव की रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है। इस रिपोर्ट में नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल में पहुंच रहे सीवेज की स्थिति, नगर निकायों की व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों का विवरण सामने आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर NGT आगे की कार्रवाई या अतिरिक्त निर्देश जारी कर सकता है।

नदियों के संरक्षण के लिए जवाबदेही जरूरी

मध्यप्रदेश की नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल नदियां पर्यावरण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इनके प्रदूषण को रोकना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण का विषय भी है। NGT की सख्ती के बाद अब सरकार और संबंधित नगर निकायों पर सीवेज प्रबंधन को बेहतर बनाने का दबाव बढ़ गया है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि राज्य में नदी प्रदूषण रोकने के लिए वर्तमान में क्या व्यवस्था है और आगे इसे किस तरह मजबूत किया जाएगा।

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