TMC Rebel MPs: SC के आदेश के बाद ओम बिरला का नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब

TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नोटिस जारी किया है। सांसदों से सात दिन में जवाब मांगा गया है। यह कदम अभिषेक बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट याचिका की सुनवाई के बाद आया, जिसमें अयोग्यता मामलों पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी।

TMC Rebel MPs

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 26, 2026

TMC Rebel MPs:  सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को लोकसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इन सांसदों के खिलाफ पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए याचिकाएं दाखिल की थीं। अब सचिवालय ने संबंधित सांसदों से इन याचिकाओं पर अपना पक्ष रखने को कहा है। सांसदों को जवाब देने के लिए सात दिनों की समयसीमा दी गई है।

अभिषेक बनर्जी ने की सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग

मामला उन 20 सांसदों से जुड़ा है, जिन्हें TMC नेतृत्व बागी मान रहा है। अभिषेक बनर्जी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि इन सांसदों ने पार्टी की सदस्यता और राजनीतिक निष्ठा से अलग रुख अपनाया है। इसी आधार पर उन्हें सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई।

लोकसभा सचिवालय ने जवाब के लिए दिया सात दिन का समय

अब लोकसभा सचिवालय ने इन याचिकाओं पर संबंधित सांसदों का जवाब मांगते हुए नोटिस भेजा है। सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है। नोटिस जारी होने से TMC और इन सांसदों के बीच चल रहा विवाद अब औपचारिक संसदीय प्रक्रिया के चरण में पहुंच गया है।

सुप्रीम कोर्ट में भी हुई थी मामले पर सुनवाई

इस विवाद को लेकर TMC की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सभी 20 बागी सांसदों के खिलाफ नोटिस जारी किया था। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष से दलबदल विरोधी कानून के तहत दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने की मांग की गई थी।

20 सांसदों के NCPI में शामिल होने का दावा

मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, ये सभी 20 सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं। इसी घटनाक्रम को लेकर TMC की ओर से दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। अब सांसदों का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनके पक्ष और परिस्थितियों के आधार पर आगे की संसदीय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में TMC की याचिका पर सुनवाई

अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लोकसभा अध्यक्ष को संबंधित अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का निर्देश देने की मांग की थी। उनका पक्ष था कि दलबदल विरोधी कानून के तहत उठाए गए मामले लंबे समय तक लंबित नहीं रहने चाहिए। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया।

लोकसभा स्पीकर की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से सॉलिसिटर जनरल पेश हुए। अदालत के समक्ष मामले से जुड़े पक्षों और दलबदल विरोधी कानून के तहत उठाए गए सवालों पर सुनवाई हुई। अब लोकसभा सचिवालय की ओर से सांसदों को नोटिस जारी किए जाने के बाद इस मामले में अगला कदम उनके जवाब पर निर्भर करेगा।

दलबदल विरोधी कानून के तहत बढ़ी कानूनी अहमियत

दलबदल विरोधी कानून का उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों के राजनीतिक दल बदलने से जुड़े मामलों को नियंत्रित करना है। ऐसे मामलों में सांसद की सदस्यता पर फैसला संसदीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। TMC की ओर से दायर याचिकाओं और सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अब लोकसभा सचिवालय की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।

सांसदों के जवाब के बाद तय होगी आगे की दिशा

सात दिनों के भीतर 20 सांसदों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है। सांसद अपने ऊपर लगाए गए आरोपों और अयोग्यता की मांग पर अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद संबंधित संवैधानिक और संसदीय प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। फिलहाल नोटिस जारी होने से TMC के बागी सांसदों से जुड़ा विवाद संसद और अदालत, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण राजनीतिक मामला बन गया है।

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