New Year 2026: हर साल 31 दिसंबर की रात 12 बजे जैसे ही घड़ी की सुई नए दिन की शुरुआत करती है, दुनिया भर में लोग पुराने साल को अलविदा कहकर नए साल का स्वागत करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर 1 जनवरी को ही नए साल की शुरुआत क्यों होती है? इसके पीछे एक लंबा इतिहास और रोचक परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
रोमन साम्राज्य और कैलेंडर की शुरुआत

नए साल का इतिहास रोमन साम्राज्य से जुड़ा है। 45 ईसा पूर्व के समय में रोम के राजा नूमा पोंपिलुस के शासनकाल में रोमन कैलेंडर का चलन था। उस समय कैलेंडर में केवल 10 महीने होते थे, साल में 310 दिन और सप्ताह में 8 दिन होते थे। बाद में नूमा ने इसमें बदलाव किए और जनवरी को साल का पहला महीना घोषित किया। इसी बदलाव से नए साल की शुरुआत जनवरी से होने लगी।
जनवरी क्यों बना पहला महीना?
1582 ईस्वी से पहले नया साल मार्च में वसंत ऋतु के साथ शुरू होता था। मार्च का नाम रोमन देवता मार्स के नाम पर रखा गया था, जो युद्ध के देवता माने जाते थे। वहीं जनवरी का नाम रोमन देवता जेनस से लिया गया है। जेनस के दो चेहरे थे—एक आगे की ओर और दूसरा पीछे की ओर। आगे वाला चेहरा शुरुआत का प्रतीक था और पीछे वाला अंत का। इसी वजह से नूमा ने साल की शुरुआत के लिए जेनस को चुना और जनवरी को पहला महीना बना दिया।
जूलियस सीजर और नया कैलेंडर
जीसस क्राइस्ट के जन्म से लगभग 46 साल पहले रोमन शासक जूलियस सीजर ने नई गणनाओं के आधार पर एक नया कैलेंडर तैयार किया। उन्होंने घोषणा की कि साल की शुरुआत 1 जनवरी से होगी। धरती सूर्य की परिक्रमा 365 दिन और 6 घंटे में पूरी करती है। जब जनवरी और फरवरी को कैलेंडर में जोड़ा गया तो गणना में कुछ असमानता आई। इसके बाद खगोलविदों ने इस पर गहन अध्ययन किया और इसे सुधारने का प्रयास किया।
ग्रेगोरियन कैलेंडर की स्थापना

किसी भी कैलेंडर को सूर्य चक्र या चंद्र चक्र की गणना पर आधारित बनाया जाता है। चंद्र चक्र पर आधारित कैलेंडर में 354 दिन होते हैं, जबकि सूर्य चक्र पर आधारित कैलेंडर में 365 दिन होते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर सूर्य चक्र पर आधारित है और आज दुनिया के अधिकांश देशों में इसी का उपयोग किया जाता है। 1582 ईस्वी में ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत हुई और तभी से 1 जनवरी को नए साल का जश्न मनाने की परंपरा स्थापित हो गई।
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