Nepal flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भारी तबाही ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शुरुआती दौर में काठमांडू सरकार ने किसी भी प्रकार की विदेशी राहत टीमों को अनुमति देने से इंकार कर दिया था, लेकिन अब स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते इस रुख में बड़ा बदलाव किया गया है। नेपाल सरकार ने अपने फैसले को पलटते हुए अब सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों और खोज-बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) टीमों को देश में आने की अनुमति दे दी है।
नेपाल में बाढ़ का भयावह कहर! 587 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता और
भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए भेजी सहायता
नेपाल द्वारा विदेशी मदद स्वीकार करने के अनुरोध के बाद भारत ने बिना किसी देरी के तुरंत प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने जानकारी दी है कि नेपाल के आधिकारिक अनुरोध पर भारत अपनी टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर चुका है। सबसे पहले एक विशेष सर्वे टीम भेजी जा रही है, जो जमीनी हालात का बारीकी से आकलन करेगी और टनल में बचाव कार्यों के लिए जरूरी उपकरणों की पहचान करेगी।
इसके साथ ही एक प्रशिक्षित चिकित्सा टीम भी नेपाल के लिए रवाना हो चुकी है। भारत ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टूटी हुई कनेक्टिविटी को तुरंत बहाल करने के लिए बेली ब्रिज और तकनीकी विशेषज्ञ टीमों का भी प्रस्ताव दिया है, जिसमें से एक बेली ब्रिज पहले से ही नेपाल में उपलब्ध कराया जा चुका है।
नेपाल को क्यों बदलना पड़ा अपना फैसला?
‘काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबरों के बाद उनके गृह देशों की तरफ से भारी कूटनीतिक दबाव बनाया जा रहा था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह लगातार मांग की जा रही थी कि कम से कम खोज-बचाव टीमों और विशेष विशेषज्ञों को घटनास्थल तक जाने दिया जाए, ताकि उनके लापता नागरिकों की तलाश की जा सके। इन्ही दबावों के चलते नेपाल सरकार ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में सीमित विदेशी विशेषज्ञों को अनुमति देने का निर्णय लिया है।
विशेष तौर पर रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थित हाइड्रोपावर टनल के अंदर दर्जनों लोगों के फंसे या लापता होने की आशंका है। स्थानीय स्तर पर बचाव अभियान में सीमित प्रगति और विशेष टनल रेस्क्यू विशेषज्ञता की भारी कमी ने भी इस फैसले को प्रभावित किया है। इसके अलावा, नेपाल के पास डीएनए टेस्टिंग और उन्नत फॉरेंसिक पहचान की क्षमता सीमित होने के कारण भी विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेना अनिवार्य हो गया था, जो शवों की पहचान करने में स्थानीय प्रशासन की सहायता करेंगे।
भारत की ओर से लगातार जारी है मानवीय सहायता
भारत ने मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए नेपाल को राहत सामग्री की तीसरी खेप के रूप में 10 टन आवश्यक सामग्री भेजी है। इस खेप में पोर्टेबल जनरेटर, डिग्निटी किट, सूखा राशन और जल शुद्धीकरण टैबलेट जैसी जीवन रक्षक वस्तुएं शामिल हैं। इसी राहत उड़ान के जरिए 11 सदस्यीय डॉक्टर, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की विशेष टीम भी नेपाल भेजी गई है। इसके साथ ही, गत 26 अगस्त से लेकर अब तक भारत द्वारा नेपाल भेजी गई कुल राहत सहायता का आंकड़ा बढ़कर 57.5 टन पहुंच गया है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत पड़ोसियों के संबंधों को दर्शाता है।
Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में तबाही के बीच भारत सबसे पहले पहुंचा, 12 घंटे में भेजी राहत










