Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ बनी काल, एक घर से 24 शव बरामद; बढ़ी महामारी की चिंता

नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही जारी है। अब तक 939 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 4,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

Nepal Flood

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 1, 2026

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Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए विनाश को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का असर अब भी कम नहीं हुआ है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। जगह-जगह मलबे के ढेर के बीच लापता लोगों की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू एजेंसियों के अनुसार, अब तक करीब 939 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

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एक ही घर के मलबे से मिले 24 शव

नुवाकोट जिले में मंगलवार को रेस्क्यू अभियान के दौरान एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, भोटे कोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के बिदुर नगर पालिका-10 के वेत्रवंती इलाके में एक घर के मलबे से 24 शव बरामद किए गए।

नुवाकोट के पुलिस अधीक्षक बिपिन रेग्मी के अनुसार, बरामद शवों में 13 महिलाएं, 11 पुरुष और एक बच्चा शामिल है। फिलहाल मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। सभी शवों को पोस्टमार्टम और पहचान की प्रक्रिया के लिए काठमांडू स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल भेजा गया है।

प्रिंसिपल की सूझबूझ से बची 900 छात्रों की जान

बाढ़ के बीच त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल से राहत की एक उम्मीद भरी खबर भी सामने आई है। स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने समय रहते खतरे को भांपकर स्कूल खाली कराने का फैसला लिया। बाढ़ की चेतावनी मिलते ही उन्होंने छात्रों को परिसर से निकालकर पास की सुरक्षित पहाड़ी पर पहुंचाया।

हादसे के समय स्कूल में पढ़ने वाले 1,643 छात्रों में से करीब 900 छात्र परिसर में मौजूद थे। छात्रों के सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के कुछ ही समय बाद पानी, कीचड़ और चट्टानों का तेज बहाव स्कूल की पूरी इमारत को बहा ले गया। हालांकि, स्कूल के दो कर्मचारी समय पर बाहर नहीं निकल पाए और अभी तक लापता हैं।

हजारों लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं

आपदा के कई दिन बाद भी बड़ी संख्या में लोगों की तलाश जारी है। करीब 4,000 लोगों के लापता होने की सूचना है। रसुवा जिले के उत्तरगया गांव में ही लगभग 350 छात्रों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। लगातार खराब हालात और मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में भी फंसे हैं कर्मचारी

बाढ़ और भूस्खलन का असर नेपाल के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ा है। त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले करीब 40 से 42 इंजीनियर आपदा के दौरान वहां फंस गए। हादसे के छठे दिन तक भी वहां राहत-बचाव अभियान शुरू नहीं हो सका था।

वहीं त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। यहां इंजीनियरों, अधिकारियों और श्रमिकों समेत करीब 118 लोग फंसे हुए हैं। इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण चिंता और बढ़ गई है।

सड़ते शवों से महामारी का खतरा

आपदा के करीब एक सप्ताह बाद प्रभावित क्षेत्रों में एक और गंभीर समस्या सामने आ रही है। मलबे और दलदल में दबे शवों के सड़ने से कई इलाकों में दुर्गंध फैलने लगी है। इससे संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

अब रेस्क्यू एजेंसियों के सामने केवल लापता लोगों और शवों को निकालने की चुनौती नहीं है, बल्कि प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन, साफ-सफाई और संक्रमण रोकने की जिम्मेदारी भी बड़ी चिंता बन गई है। राहत टीमों को एक साथ बचाव कार्य और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से निपटना पड़ रहा है।

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