Nepal Tunnel Rescue: 93 मजदूर लापता, थर्मल ड्रोन ने खंगाली सुरंग; फिर भी नहीं मिला कोई सुराग

नेपाल के रसुवा जिले में बाढ़ से प्रभावित रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े 93 मजदूर लापता हैं। नेपाली सेना, इंजीनियरों और ड्रोन टीम ने सुरंग के सबसे अंदरूनी हिस्से तक तलाशी ली, लेकिन थर्मल ड्रोन को भी कोई इंसानी मौजूदगी नहीं मिली। अब सवाल है कि लापता मजदूर आखिर कहां हैं?

Nepal Tunnel Rescue

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 31, 2026

Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बीच हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे लोगों की तलाश लगातार जारी है। रसुवा जिले के रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में लापता कर्मचारियों को खोजने के लिए नेपाली सेना और विशेषज्ञों की टीम ने अभियान चलाया। थर्मल ड्रोन की मदद से सुरंग के अंदर और उसके दूसरे छोर तक तलाशी ली गई, लेकिन अभियान के दौरान किसी जीवित व्यक्ति का पता नहीं चल सका। इस प्रोजेक्ट में कम से कम 93 कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका जताई गई थी।

नेपाली सेना और ड्रोन टीम ने संभाला मोर्चा

रसुवागढ़ी में चलाए गए बचाव अभियान में नेपाली सेना के जवानों के साथ इंजीनियर और ड्रोन विशेषज्ञ शामिल थे। भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद आशंका थी कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे कर्मचारी सुरंग के किसी हिस्से में फंस गए होंगे। इसी संभावना को देखते हुए बचाव दल ने सुरंग के भीतर जाकर स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया। अभियान के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।

सुरंग के दूसरे छोर तक पहुंची टीम

बचाव दल सुरंग के अंतिम हिस्से तक पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद टीम ने ऐसे स्थानों की जांच के लिए ड्रोन का सहारा लिया, जहां सीधे पहुंचना मुश्किल या जोखिम भरा हो सकता था। थर्मल तकनीक से लैस ड्रोन के जरिए सुरंग के अलग-अलग हिस्सों को स्कैन किया गया। हालांकि तलाशी के दौरान किसी व्यक्ति की मौजूदगी का संकेत नहीं मिला। इससे वहां फंसे कर्मचारियों की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

जीवित व्यक्ति का संकेत नहीं मिलने पर अभियान रोका

नेपाल के प्रधानमंत्री सचिवालय के मुताबिक, सेना के नेतृत्व वाली टीम 111 मेगावाट क्षमता वाले रसुवागढ़ी प्रोजेक्ट की सुरंग में तलाशी पूरी करने के बाद वापस लौट आई। ड्रोन टीम को जब सुरंग के भीतर किसी व्यक्ति की मौजूदगी का संकेत नहीं मिला, तो तत्काल तलाशी अभियान रोक दिया गया। इसके बाद बचाव दल रसुवा जिले के धुंचे लौट आया। हालांकि अन्य प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव गतिविधियां जारी हैं।

बाढ़ के बीच जमीन के नीचे काम कर रहे थे सैकड़ों कर्मचारी

नेपाल में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। जिस समय भोटे कोशी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा था, उस दौरान विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में सैकड़ों कर्मचारी जमीन के नीचे सुरंगों में काम कर रहे थे। बाढ़ के बाद कई कर्मचारियों से संपर्क टूट गया। राहत दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि लापता लोग सुरंगों में फंसे हैं, सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए हैं या फिर बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हैं।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से 933 लोग अब भी लापता

नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA ने सोमवार को बताया कि देश में हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े 933 लोग लापता हैं। यह आंकड़ा बाढ़ के बाद पैदा हुए संकट की गंभीरता को दर्शाता है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण अलग-अलग परियोजनाओं और प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान तेज किया गया है।

279 लोगों को सुरंगों से सुरक्षित निकाला गया

बचाव अभियानों के दौरान राहत दलों को कुछ सफलता भी मिली है। अब तक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों से 279 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट से बचाए गए 254 कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा लांगटांग खोला साइट से 18 लोगों को भी सुरक्षित निकाला गया है। बचाव टीमों की कोशिश है कि बाकी लापता लोगों तक भी जल्द पहुंचा जा सके।

11 प्रोजेक्ट्स में 897 लोगों से संपर्क टूटा

इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल यानी IPPAN ने भी हाइड्रोपावर क्षेत्र में बड़े स्तर पर कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी दी है। संगठन के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थित 11 हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले 897 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर होने के बावजूद स्थिति की गंभीरता स्पष्ट है।

बाढ़ के बाद बचाव अभियान बड़ी चुनौती

नेपाल में जारी प्राकृतिक आपदा ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं के सामने भी गंभीर संकट पैदा कर दिया है। सुरंगों में पानी, मलबा और क्षतिग्रस्त ढांचे के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई स्थानों पर सीधे अंदर जाना जोखिम भरा है, इसलिए ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों की मदद ली जा रही है। रसुवागढ़ी में थर्मल ड्रोन से हुई तलाशी के बावजूद किसी जीवित व्यक्ति का पता नहीं चलना बचाव अभियान के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

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