NEET Paper Leak Case : NEET पेपर लीक मामले में तीन राज्यों से 7 गिरफ्तार, सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका

लाखों मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में देशव्यापी भूचाल आ गया है। सीबीआई ने तीन राज्यों में छापेमारी कर मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में एनटीए को बदलने की याचिका दायर हो चुकी है। आखिर इस महा-घोटाले का असली किंगपिन कौन है? जानिए अंदर की कहानी।

NEET Paper Leak Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 14, 2026

NEET Paper Leak Case : NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक तीन प्रमुख राज्यों—महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से कुल 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियों ने बुधवार को महाराष्ट्र के पुणे से एक महिला ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे और अहिल्यानगर से 26 वर्षीय धनंजय निवृत्ति लोखंडे को गिरफ्तार किया। इससे पहले 12 मई को नासिक से शुभम खैरनार को पकड़ा जा चुका है। इन गिरफ्तारियों ने इस गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा की शुचिता को भंग करने में लिप्त था।

राजस्थान में गहराया संकट: एक हजार छात्रों तक पहुंचा लीक पेपर

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। SOG के मुताबिक, राजस्थान में लगभग एक हजार उम्मीदवारों तक यह लीक पेपर पहुंचाया गया था। इस कड़ी में राजस्थान से तीन लोगों को पकड़ा गया है, जिनमें सीकर का कंसल्टेंसी संचालक राकेश मंडवरिया और पेपर की खरीद-फरोख्त करने वाले दो भाई—दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल शामिल हैं। वहीं, हरियाणा के गुरुग्राम से बीएएमएस (BAMS) प्रथम वर्ष के छात्र यश यादव को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।

मेडिकल एसोसिएशन पहुंची सुप्रीम कोर्ट: दोबारा परीक्षा कराने की मांग

NEET UG 2026 परीक्षा में हुई धांधली को देखते हुए फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। FAIMA ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर मांग की है कि पूरी परीक्षा को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा आयोजित किया जाना चाहिए। एसोसिएशन का तर्क है कि पेपर लीक ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है और पारदर्शिता बहाल करने के लिए दोबारा परीक्षा ही एकमात्र विकल्प है।

NTA पर उठा सवाल: गवर्निंग बॉडी के पुनर्गठन की अपील

FAIMA ने अपनी याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने कहा कि लगातार होती गड़बड़ियों के कारण अब छात्रों और अभिभावकों का NTA से भरोसा उठ चुका है। याचिका में मांग की गई है कि NTA की मौजूदा गवर्निंग बॉडी को तुरंत भंग कर इसका पुनर्गठन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी बड़ी परीक्षाओं का आयोजन बिना किसी विवाद और गड़बड़ी के सुनिश्चित हो सके।

3 मई की परीक्षा और 22 लाख छात्रों का भविष्य

उल्लेखनीय है कि NEET UG परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लगभग 22.79 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक की खबरें सामने आने लगी थीं, जिसे शुरुआत में नकारने के बाद अंततः 12 मई को NTA ने स्वीकार किया। गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इस फैसले ने मेडिकल करियर का सपना देख रहे लाखों परिवारों के बीच अनिश्चितता और रोष का माहौल पैदा कर दिया है।

जांच का बढ़ता दायरा और प्रशासनिक चुनौतियां

जैसे-जैसे CBI की जांच आगे बढ़ रही है, नए-नए नाम सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियां अब उन ‘कैंडिडेट्स’ की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने पैसे देकर पेपर खरीदा था। सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब एक निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया को फिर से खड़ा करने की है, ताकि मेधावी छात्रों के साथ न्याय हो सके। फिलहाल, सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो इस परीक्षा का भविष्य तय करेगा।

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