NEET UG 2026: नीट पेपर लीक पर सियासी संग्राम! अशोक गहलोत ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर पेपर लीक की जानकारी दो हफ्ते तक छिपाने और एफआईआर दर्ज न करने का गंभीर आरोप लगाया है। गहलोत ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

NEET UG 2026

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 12, 2026

NEET UG 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट यूजी 2026 परीक्षा को रद्द करने के फैसले ने देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों को झकझोर कर रख दिया है। पेपर लीक के विवादों के बीच लिए गए इस निर्णय के बाद राजस्थान की सियासत में उबाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार की घेराबंदी करते हुए उन पर ‘सच्चाई छिपाने’ और ‘अपराधियों को संरक्षण देने’ के गंभीर आरोप लगाए हैं।

नीट प्रवेश परीक्षा निरस्त होने के पीछे बड़े भ्रष्टाचार के संकेत

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि परीक्षा का रद्द होना इस बात का प्रमाण है कि धांधली बहुत बड़े स्तर पर हुई थी। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने जानबूझकर दो सप्ताह तक पेपर लीक की जानकारी को सार्वजनिक नहीं होने दिया। गहलोत के अनुसार, सरकार ने सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश की, जिससे न केवल जांच प्रभावित हुई बल्कि लाखों युवाओं का भविष्य भी दांव पर लग गया। उन्होंने इसे प्रदेश के मेहनती छात्रों के साथ एक बड़ा विश्वासघात करार दिया है।

NTA के साहसिक निर्णय की प्रशंसा

पूर्व मुख्यमंत्री ने जहाँ एक ओर राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया, वहीं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई (CBI) को जांच सौंपने और परीक्षा निरस्त करने का निर्णय युवाओं के हित में लिया गया एक ‘साहसिक फैसला’ है। गहलोत ने तर्क दिया कि यदि मामला केंद्रीय एजेंसी को नहीं सौंपा जाता, तो शायद इस घोटाले की जड़ें कभी सामने नहीं आ पातीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एसओजी (SOG) की जांच में लोग पकड़े जा रहे थे, तब राज्य सरकार एफआईआर (FIR) दर्ज करने से क्यों हिचकिचा रही थी।

भजनलाल सरकार पर केस दबाने का आरोप

अशोक गहलोत ने अपने बयान में वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए पिछले विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इससे पहले कर्मचारी चयन बोर्ड में हुए ओएमआर (OMR) शीट घोटाले को भी इसी तरह दबाने का प्रयास किया था ताकि सरकार की छवि धूमिल न हो। गहलोत के मुताबिक, कमजोर कानूनी पैरवी के कारण उस समय के आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई। उन्होंने दावा किया कि नीट मामले में भी सरकार ने कई दिनों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की, जो किसी ‘प्रभावशाली व्यक्ति’ को बचाने की कोशिश की ओर इशारा करता है।

पेपर लीक की टाइमलाइन

गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन आरोप है कि इसके प्रश्नपत्र 2 मई को ही ‘गेस पेपर’ के नाम पर लीक कर दिए गए थे। गहलोत ने सवाल किया कि दो दिन पहले से चल रही खबरों के बावजूद शासन-प्रशासन मौन क्यों था? उन्होंने कहा कि दो दिन पहले ही कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद अब सच्चाई बेनकाब हुई है। पूर्व सीएम ने अंत में कड़े शब्दों में कहा कि इस प्रशासनिक विफलता ने भाजपा का ‘असली चेहरा’ जनता के सामने ला दिया है।