UP News: सोमवार को धर्मनगरी वाराणसी में देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) में हुए कथित महाघोटाले और लगातार लीक हो रहे प्रश्नपत्रों के खिलाफ राजनीति का सबसे हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय नेता और सिराथू विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. पल्लवी पटेल के नेतृत्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मुख्य सिंहद्वार पर एक विशाल और आक्रामक विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया।
इस आंदोलन को विफल करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने रविवार रात से ही तगड़ी नाकेबंदी कर रखी थी, लेकिन जुझारू विधायक ने फिल्मी अंदाज में अपना चेहरा कपड़े से ढककर खाकी वर्दी के सख्त पहरे को चकमा दिया और सीधे बीएचयू गेट पर पहुंच गईं। पल्लवी पटेल को अचानक अपने बीच पाकर सैकड़ों युवाओं और कार्यकर्ताओं का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने वहीं से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थानीय संसदीय जनसंपर्क कार्यालय की तरफ मार्च करना शुरू कर दिया।
रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर फूटा युवाओं का गुस्सा
बीएचयू गेट पर एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने केवल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की लेखपाल भर्ती और यूपीएसआई (UPSI) जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर भी राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
अपना दल (कमेरावादी) के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सामूहिक लड़ाई देश के करोड़ों होनहार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की है। आंदोलनकारियों ने शासन के सामने पांच सूत्रीय बड़ी मांगें रखीं, जिसमें नीट घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और सिटिंग जज की देखरेख में कराने, लेखपाल भर्ती परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर दोबारा आयोजित करने और दरोगा भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए तुरंत स्कोरकार्ड जारी करने की बात प्रमुख थी। इसके साथ ही आक्रोशित युवाओं ने मांग की कि पेपर लीक करने वाले भू-माफियाओं के नाम प्रमुख चौराहों पर सार्वजनिक किए जाएं और दोषी एनटीए (NTA) अधिकारियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाकर उन्हें सीधे जेल भेजा जाए।
पीएमओ की तरफ मार्च करते ही खाकी का एक्शन
जैसे ही आक्रोशित आंदोलनकारियों का भारी हुजूम प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ बढ़ने लगा, पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवानों ने मजबूत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक और जमकर धक्का-मुक्की हुई। बिना आधिकारिक अनुमति के जुलूस निकालने का हवाला देते हुए वाराणसी पुलिस ने विधायक पल्लवी पटेल, प्रदेश महासचिव गगन प्रकाश यादव एडवोकेट, राजेश प्रधान, रामशिला पटेल, अजय सिंह और दिलीप पटेल समेत बड़ी संख्या में लोगों को जबरन हिरासत में ले लिया। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि शहर की कानून और शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी, वहीं इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद पूरे पूर्वांचल के छात्र संगठनों और युवाओं में भारी आक्रोश भड़क गया है।
खुफिया तंत्र और पुलिस कमिश्नर की घेराबंदी फेल
इस बड़े जनआंदोलन को कुचलने के लिए वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के कड़े निर्देश पर बनारस के चारों तरफ भारी फोर्स तैनात की गई थी। खुफिया इनपुट मिलते ही रविवार की देर रात जब पल्लवी पटेल लखनऊ से जौनपुर के रास्ते वाराणसी आ रही थीं, तब पुलिस की एक विशेष टीम ने उन्हें जौनपुर बॉर्डर पर ही रोक लिया था।
रात के अंधेरे में स्थानीय प्रशासन को लगा कि उन्होंने विपक्ष की रणनीति को काबू कर लिया है, लेकिन पल्लवी पटेल बेहद सूझबूझ के साथ पुलिस के बिछाए जाल से निकलकर बनारस की सीमा में दाखिल होने में कामयाब रहीं। शहर के भीतर भी जिला प्रशासन ने आंदोलन को कमजोर करने के लिए सुबह-सुबह ही पार्टी के कई दिग्गज पदाधिकारियों और मुख्य कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया था, पर इसके बावजूद बीएचयू के सिंहद्वार पर मचे इस अप्रत्याशित हड़कंप ने प्रशासन की सारी तैयारियों और चाक-चौबंद सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी।










