NEET-PG 2025: तीसरे राउंड में कट-ऑफ कम, खाली सीटों पर काउंसलिंग शुरू

NEET-PG 2025 में क्वालिफाई करने के लिए पहले न्यूनतम कट-ऑफ तय थी: जनरल/EWS 50वां परसेंटाइल (~276 अंक), PwBD 45वां (~255 अंक), SC/ST/OBC 40वां (~235 अंक)।

तीसरे राउंड में कट-ऑफ कम

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जनवरी 14, 2026

NEET-PG 2025: NEET-PG 2025 में क्वालिफाई करने के लिए पहले न्यूनतम अंक तय थे। जनरल और EWS वर्ग के लिए 50वां परसेंटाइल (~276 अंक), PwBD (जनरल) के लिए 45वां परसेंटाइल (~255 अंक) और SC, ST, OBC वर्ग के लिए 40वां परसेंटाइल (~235 अंक) निर्धारित थे। इसका मतलब था कि PG में दाखिला पाने के लिए सभी उम्मीदवारों को कम से कम 235 अंक लाना अनिवार्य था।

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अब क्या बदलाव हुआ?

NBEMS ने नई अधिसूचना जारी कर कट-ऑफ को काफी नीचे कर दिया है। अब जनरल और EWS वर्ग के लिए कट-ऑफ 7वां परसेंटाइल (~103 अंक), PwBD (जनरल) के लिए 5वां परसेंटाइल (~90 अंक) और SC, ST, OBC वर्ग के लिए 0वां परसेंटाइल (माइनस 40 अंक तक) कर दिया गया है। यह बदलाव केवल काउंसलिंग में भाग लेने के लिए पात्रता तय करने के लिए है; उम्मीदवारों की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

तीसरे राउंड में कट-ऑफ कम
तीसरे राउंड में कट-ऑफ कम

सरकार और NBEMS के अनुसार, पहले और दूसरे राउंड के बाद भी देशभर में PG मेडिकल सीटों का एक बड़ा हिस्सा खाली रह गया था। देश में डॉक्टरों की कमी और खाली सीटों के विरोधाभास को देखते हुए कट-ऑफ कम करना जरूरी था। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक उम्मीदवारों को काउंसलिंग में शामिल कराना और खाली सीटों को भरना है।

खाली सीटों के कारण

खाली सीटों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फीस अधिक होने के कारण सामान्य और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए PG मुश्किल हो गया। कुछ राज्यों में PG पूरी करने के बाद सरकारी बंधन के तहत कठिन इलाकों में पोस्टिंग करनी पड़ती है। सर्जरी, एनेस्थीसिया और अन्य विशेषताओं में काम का दबाव और कानूनी जोखिम अधिक है। साथ ही जूनियर डॉक्टरों के लंबे घंटे और सुरक्षा की कमी भी प्रमुख कारण हैं।

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इसका असर क्या होगा?

इस फैसले पर मेडिकल जगत में बहस शुरू हो गई है। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि PG में प्रवेश स्तर बहुत नीचे चला गया तो भविष्य में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि सभी उम्मीदवार पहले से MBBS पास हैं और रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कट-ऑफ घटाने का मुख्य उद्देश्य खाली सीटों को भरना और डॉक्टरों की कमी को कुछ हद तक पूरा करना है।

NEET-PG का महत्व

NEET-PG भारत की सबसे बड़ी और जरूरी मेडिकल परीक्षाओं में से एक है। MBBS करने के बाद डॉक्टर इसी परीक्षा के जरिए MD, MS और आगे सुपर स्पेशलिटी कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। इस परीक्षा के बिना डॉक्टर पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज में प्रवेश नहीं ले सकते।

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