NEET Paper Leak: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सामने आ रहे पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में महत्वपूर्ण संशोधन करने पर विचार कर रही है। इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना और युवाओं का प्रतियोगी परीक्षाओं पर भरोसा मजबूत करना है। जानकारी के मुताबिक, इन संशोधनों को लेकर प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विचार के लिए रखा जा सकता है।
पीएम मोदी ने दिए थे त्वरित कार्रवाई के संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेपर लीक के मामलों पर सख्त रुख अपनाने की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में दोषियों को जल्द और कठोर सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे ताकि मामलों का निपटारा लंबित न रहे।
फास्ट ट्रैक कोर्ट को मिल सकते हैं विशेष अधिकार
प्रस्तावित संशोधनों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना और उनकी शक्तियों को बढ़ाने से जुड़ा माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए अलग अदालतों का प्रावधान किया जा सकता है। इन अदालतों को ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई और समयबद्ध फैसले सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण दोषियों को मिलने वाले अवसरों को कम किया जाए।
सजा और जुर्माने को और कठोर बनाने की तैयारी
केंद्र सरकार कानून को इस स्तर तक सख्त बनाना चाहती है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संगठित गिरोह परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करने का साहस न कर सके। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों में मौजूदा सजा की अवधि बढ़ाने और आर्थिक दंड को अधिक कठोर बनाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि कड़ी सजा और भारी जुर्माना ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि, संशोधित प्रावधानों की अंतिम रूपरेखा पर आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
वर्तमान कानून में क्या हैं प्रावधान?
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार सामान्य अनियमितता या परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने के दोषी व्यक्ति को तीन से पांच वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यदि कोई सेवा प्रदाता संस्था इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उस पर एक करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। वहीं संगठित अपराध या बड़े स्तर पर पेपर लीक जैसे मामलों में पांच से दस वर्ष तक की कैद और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना सरकार का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए कानून को और मजबूत बनाने के साथ-साथ मामलों का समयबद्ध निपटारा भी जरूरी है। प्रस्तावित संशोधनों के जरिए परीक्षा माफिया, पेपर लीक गिरोह और अन्य दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल इन संशोधनों को मंजूरी देता है, तो इसके बाद विधायी प्रक्रिया के माध्यम से इन्हें लागू किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का भरोसा और मजबूत होगा।
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