UP STF Action : उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की नोएडा यूनिट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क और शेल कंपनियों के जरिए कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी से एक चीनी नागरिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह फर्जी कंपनियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के माध्यम से अवैध धन के प्रवाह को संचालित कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
एसटीएफ ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई, गाजियाबाद निवासी संजीव कुमार और औरैया निवासी कौशलेन्द्र शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, लियाओ लोंगहुई भारत में वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से रह रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि वह कथित रूप से फर्जी भारतीय पहचान पत्र का उपयोग कर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। अधिकारियों ने बताया कि तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनसे मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
छापेमारी में भारी मात्रा में सामान बरामद
नोएडा एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) राजकुमार मिश्रा ने बताया कि संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, दो चीनी पासपोर्ट, 10 कंपनियों की मुहरें, 11 बैंक चेकबुक और लगभग 4.72 करोड़ रुपये मूल्य के चेक बरामद किए। इसके अलावा कई दस्तावेज और कथित फर्जी पहचान पत्र भी जब्त किए गए हैं। बरामद सामग्री की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच कराई जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
फर्जी आधार कार्ड ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
एसटीएफ के अनुसार, बरामद सामान में सबसे चौंकाने वाली चीज एक कथित फर्जी आधार कार्ड है। यह आधार कार्ड “सैमुअल लोथा” नाम से बना हुआ था, जबकि उस पर लगी तस्वीर चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई की बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पहचान पत्र कैसे तैयार किया गया और इसका उपयोग किन-किन सरकारी या वित्तीय प्रक्रियाओं में किया गया। इस पहलू को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
शेल कंपनियों के जरिए चलता था कथित नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लियाओ लोंगहुई वर्ष 2018 में भारत आया था और नोएडा के सेक्टर-83 में YTL मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी चीन से महंगे दामों पर कच्चा माल मंगाती थी और दिल्ली के करोल बाग तथा नेहरू प्लेस जैसे बाजारों में अंडर-इनवॉइसिंग के जरिए मोबाइल कवर की बिक्री करती थी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से बचाए गए धन को कथित तौर पर हवाला के माध्यम से चीन भेजा जाता था।
कर्मचारियों के दस्तावेजों से बनाई गईं कंपनियां
एसटीएफ की जांच के मुताबिक, आरोपी ने अपनी कंपनी के कर्मचारियों के दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग कर कई शेल कंपनियां बनाई थीं। इनमें JNS इन्फ्रा हाइट्स, रीफैन एंटरप्राइजेज, टाइडीडेस्क एसेंशियल, जेड वन एंटरप्राइजेज और हनुराज ट्रेडिंग जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि इन कंपनियों के संचालन में चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार और कौशलेन्द्र की भी भूमिका थी। जांच एजेंसियां अब इन कंपनियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही हैं।
वीजा समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहा था आरोपी
एसटीएफ के अनुसार, लियाओ लोंगहुई का भारतीय वीजा वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद वह भारत में रह रहा था। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान उसने कथित वित्तीय अपराधों और हवाला नेटवर्क को संचालित किया। फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संबंधों, आर्थिक लेनदेन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका का भी पता लगाने में जुटी हैं।
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