NCPI New President : NCPI को मिला नया अध्यक्ष, क्या TMC बागियों की अपील मानेंगे ओम बिरला?

एनसीपीआई को नया अध्यक्ष मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, वहीं बागी टीएमसी सांसदों के विलय और समर्थन को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, सवाल यह है कि क्या यह कदम देश की राजनीति का पूरा समीकरण बदल देगा या कोई नया विवाद जन्म लेगा

NCPI New President

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 17, 2026

NCPI New President :  तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के भीतर चल रही बगावत के बीच नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में बड़ा बदलाव सामने आया है। पार्टी ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि इससे पहले यह दावा किया जा रहा था कि काकोली घोष दस्तीदार पार्टी की अध्यक्ष हैं, लेकिन उन्होंने स्वयं इस बात का खंडन किया है।

काकोली घोष दस्तीदार और बागी सांसदों की भूमिका पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी के बागी सांसदों के एक गुट का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों के एनसीपीआई में विलय की जानकारी दी थी। अब यह भी चर्चा है कि लोकसभा अध्यक्ष दोनों पक्षों—ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी सांसदों—की बात सुनने के बाद ही किसी फैसले पर पहुंचेंगे। इस पूरे मामले ने संसद में संभावित राजनीतिक समीकरण बदलने की अटकलों को जन्म दिया है।

लोकसभा स्पीकर के फैसले से पहले कानूनी प्रक्रिया पर विचार

इस विवादित मामले में लोकसभा अध्यक्ष का अंतिम निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले आने की संभावना जताई जा रही है, जो जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होगा। सूत्रों के अनुसार, किसी भी गुट को मान्यता देने से पहले लोकसभा अध्यक्ष केंद्रीय विधि मंत्रालय से लिखित राय भी ले सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए, तो स्पीकर का निर्णय कानूनी रूप से मजबूत साबित हो सके। यह प्रक्रिया दलबदल से जुड़े संवैधानिक मामलों में सामान्य रूप से अपनाई जाती है।

सांसदों की संख्या और संभावित राजनीतिक समीकरण

काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि बागी गुट में फिलहाल लगभग 20 सांसद शामिल हैं, और आने वाले समय में यह संख्या 22 तक पहुंच सकती है। एनसीपीआई ने कथित तौर पर टीएमसी के सभी बागी सांसदों को अपने साथ जोड़ने पर सहमति जताई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस गुट का पश्चिम बंगाल विधानसभा में चल रहे बागी विधायकों के विवाद से कोई संबंध नहीं है। विधानसभा स्तर पर अलग गुट को पहले ही मान्यता मिल चुकी है। यदि लोकसभा में यह बदलाव होता है, तो राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

एनडीए गठबंधन में संभावित बदलाव की चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह बागी गुट एनसीपीआई के रूप में मान्यता प्राप्त कर लेता है, तो इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (National Democratic Alliance) की ताकत में बदलाव संभव है। इससे एनसीपीआई, टीडीपी और जेडीयू जैसी पार्टियों के बीच सीटों का संतुलन प्रभावित हो सकता है। माना जा रहा है कि एनसीपीआई 16 सांसदों वाली टीडीपी और 12 सांसदों वाली जेडीयू से आगे निकल सकती है, जिससे गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन बदल जाएगा।

पार्टी नेतृत्व पर सवाल, संगठन में मतभेद उजागर

पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। एनसीपीआई के संगठन महासचिव शांतनु डे ने कहा कि उन्हें ज्योतिप्रकाश चटर्जी की नियुक्ति की कोई जानकारी नहीं है और वे उनके नाम से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर हो रहे बदलावों से संगठन को अंधेरे में रखा जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है। एनसीपीआई, जो 2023 में बनी थी और जिसका मुख्यालय हावड़ा में है, ने त्रिपुरा चुनावों में भी हिस्सा लिया था। अब पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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