NCERT Textbook Controversy : मोहनजोदड़ो की ‘डांसिंग गर्ल’ पर नया विवाद! NCERT बदलाव पर इतिहासकार नाराज

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा नौवीं की नई कला शिक्षा पुस्तक 'मधुरिमा' में मोहनजोदड़ो की ऐतिहासिक 'डांसिंग गर्ल' के धड़ को धुंधला करके ढक दिया गया है। करीब पच्चीस साल में पहली बार हुए इस अप्रत्याशित बदलाव से इतिहासकार और शिक्षाविद आखिर क्यों इतने आगबबूला हैं?

NCERT Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 15, 2026

NCERT Textbook Controversy : सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे प्रमुख ऐतिहासिक प्रतीकों में से एक, मोहनजोदड़ो की खुदाई से मिली कांसे की प्रसिद्ध ‘नर्तकी की मूर्ति’ (Dancing Girl) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 9वीं की नई किताब में इस ऐतिहासिक मूर्ति की तस्वीर को इसके मूल स्वरूप से पूरी तरह बदलकर छापा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किताब में प्रकाशित की गई नई तस्वीर में मूर्ति के धड़ वाले हिस्से को पूरी तरह से ढंक दिया गया है, जबकि इसका मूल स्वरूप बिल्कुल अलग है।

इसके साथ ही तस्वीर में मूर्ति के वास्तविक रंग-रूप में भी काफी बदलाव नजर आ रहा है। पिछले करीब 25 वर्षों से विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में इस कांस्य मूर्ति को उसके वास्तविक और मूल रूप में ही बिना किसी बदलाव के छापा जाता रहा था, लेकिन अब इसके ऐतिहासिक स्वरूप में बदलाव किए जाने पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

 ‘मधुरिमा’ किताब के पहले अध्याय में हुआ यह बदलाव

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नर्तकी की इस विवादित और परिवर्तित तस्वीर को कक्षा 9वीं की नई किताब ‘मधुरिमा’ के पहले अध्याय, जिसका शीर्षक ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ है, में शामिल किया गया है। किताब में छपी इस नई कलाकृति में मूर्ति के कंधे से नीचे के पूरे हिस्से को कपड़ों जैसी आकृति से ढंक दिया गया है, जबकि सदियों पुरानी वास्तविक मूर्ति में यह पूरा हिस्सा खुला हुआ दिखाई देता है।

आपको बता दें कि यह किताब एनसीईआरटी की नई आर्ट्स एजुकेशन सीरीज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के कड़े दिशानिर्देशों के तहत हाल ही में तैयार किया गया है। नए शैक्षणिक सत्र के लिए बोर्ड द्वारा अब तक कक्षा 1 से लेकर कक्षा 9वीं तक की कई नई किताबें बाजार में जारी की जा चुकी हैं।

इतिहासकारों ने जताया भारी आक्रोश

ऐतिहासिक कलाकृति के इस तरह रूप बदलने पर देश के जाने-माने इतिहासकारों और विशेषज्ञों ने गहरी चिंता और तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। प्रसिद्ध इतिहासकार मिशेल डैनिनो ने इस पाठ्यपुस्तक में किए गए बदलाव की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे छात्रों के ज्ञान के साथ सरासर अन्याय करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि प्राचीन इतिहास की एक अनमोल मूर्ति के पूरे धड़ को इस तरह जबरन ढंकना सीधे तौर पर एक अनैतिक सेंसरशिप है। इस बदलाव के माध्यम से स्कूली बच्चों को एक ऐसी मनगढ़ंत मूर्ति दिखाई जा रही है, जो वास्तव में पूरी दुनिया में कहीं भी मौजूद ही नहीं है।

डैनिनो ने व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब देश के मासूम छात्रों को नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में रखी मूल ऐतिहासिक प्रतिमा और देश की अन्य अर्धनग्न या नग्न प्राचीन मूर्तियों को देखने से भी पूरी तरह रोक दिया जाएगा?

विवाद पर एनसीईआरटी का स्पष्टीकरण

इस पूरे मामले और सोशल मीडिया पर उठ रहे तीखे सवालों को लेकर जब एनसीईआरटी के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उनका एक सामान्य बयान सामने आया। एनसीईआरटी के वर्तमान निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने इस बदलाव को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि किताब में इस तरह की तस्वीर छापने के पीछे परिषद की कोई खास या दुर्भावनापूर्ण वजह नहीं है।

उन्होंने सफाई देते हुए यह भी तर्क दिया कि कक्षा छठी की सोशल साइंस (सामाजिक विज्ञान) की नई पाठ्यपुस्तक में इसी नर्तकी की वास्तविक तस्वीर को उसके पूरी तरह से मूल रूप में ही प्रकाशित किया गया है, क्योंकि यह प्राचीन हड़प्पा सभ्यता की सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण खोजों में से एक मानी जाती है। हालांकि, निदेशक की इस सफाई के बावजूद शिक्षाविदों के बीच असंतोष कम नहीं हुआ है।

पहले भी नर्तकी की इस ऐतिहासिक तस्वीर के वास्तविक स्वरूप पर उठ चुकी है आपत्ति

इतिहासकार मिशेल डैनिनो ने एक पुराने साक्षात्कार में खुलासा किया था कि यह पहली बार नहीं है जब इस अनमोल मूर्ति को लेकर आपत्ति जताई गई हो। डैनिनो, जो उस समय एनसीईआरटी की कक्षा छठी की नई सोशल साइंस किताब की ‘टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी’ के प्रमुख पद पर कार्यरत थे, ने बताया था कि मई महीने में भी सिंधु घाटी सभ्यता वाले मुख्य अध्याय के पहले ही पृष्ठ पर इस नर्तकी की वास्तविक फोटो लगाने पर कुछ वरिष्ठ लोगों ने आपत्ति जताई थी।

तब कुछ समिति सदस्यों का मानना था कि मूर्ति के इस नग्न स्वरूप को देखकर समाज में विवाद खड़ा हो सकता है। भारी दबाव के बाद उस समय तस्वीर को मुख्य पृष्ठ और अध्याय की शुरुआत से हटाकर अंदर के पन्नों पर बहुत छोटे रूप में प्रकाशित किया गया था, लेकिन तब तस्वीर के मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी।

मोहनजोदड़ो की इस विश्व प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ मूर्ति से जुड़ी 3 सबसे महत्वपूर्ण बातें:

  • ऐतिहासिक खोज: ‘डांसिंग गर्ल’ के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर यह ऐतिहासिक और लगभग 4 इंच ऊंची कांस्य मूर्ति साल 1926 में पुरातत्वविदों को मोहनजोदड़ो की खुदाई के दौरान मिली थी।

  • अनोखी शारीरिक बनावट: इस प्राचीन मूर्ति में एक युवती को बालों का जूड़ा बांधे हुए बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है, जिसके हाथों में ढेर सारी पारंपरिक चूड़ियां और गले में एक सुंदर हार मौजूद है। इस अनूठी प्रतिमा में युवती अपना दाहिना हाथ अपनी कमर पर और बायां हाथ अपनी जांघ पर रखे हुए एक विशिष्ट नृत्य मुद्रा में खड़ी है।

  • सुरक्षित स्थान: सिंधु घाटी सभ्यता की कला का यह सबसे बेजोड़ और जीवंत उदाहरण वर्तमान समय में देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित प्रतिष्ठित ‘नेशनल म्यूजियम’ (राष्ट्रीय संग्रहालय) में आम जनता और शोधकर्ताओं के देखने के लिए बेहद सुरक्षित रखा गया है।

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