Narottam Mishra: नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं ने सबको किया भावुक, मंच पर सुनाई दिल की बात

दतिया उपचुनाव के दौरान बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित जनसभा में वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा मंच पर बेहद भावुक हो गए।

Narottam Mishra

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 13, 2026

Narottam Mishra: दतिया उपचुनाव के माहौल के बीच मध्य प्रदेश की राजनीति में एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा, जो अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं, दतिया में पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित जनसभा के दौरान मंच पर ही भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वे अपना भाषण बीच में ही छोड़कर अपनी सीट पर बैठ गए।

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पार्टी के प्रति समर्पण और भावुकता

सभा को संबोधित करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने अपनी पार्टी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। जिस पार्टी ने मुझे 30 वर्षों तक विधायक और 15 वर्षों तक मंत्री के रूप में जिम्मेदारी दी, उसके बाद मुझे और क्या चाहिए?” उन्होंने आगे कहा कि वे स्वयं इस चुनाव में पूरी तरह समर्पित हैं। कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सभी को आशुतोष तिवारी की जीत के लिए अपने प्राण झोंकने होंगे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कोई भी कार्यकर्ता घर पर नहीं बैठेगा और वे स्वयं दतिया में डेरा जमाकर चुनाव का संचालन करेंगे।

भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “मैं दतिया के एक-एक दरवाजे पर अपना शीश नवाऊंगा और हर गांव तक जाकर लोगों से आशुतोष को जिताने की अपील करूंगा।” यह कहते ही वे इतने भावुक हो गए कि शब्द उनके गले में फंस गए और उन्होंने अपना संबोधन वहीं समाप्त कर दिया।

कांग्रेस पर हमला और राजा-रंक का मुकाबला

अपने भाषण के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर तीखे हमले किए। उन्होंने इस चुनाव को ‘राजा और रंक’ की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ आशुतोष तिवारी जैसे कार्यकर्ता हैं जो बचपन से ही राष्ट्र सेवा में लगे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के वे नेता हैं जिनका अहंकार जगजाहिर है। कांग्रेस के नेताओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “जीतू पटवारी कहते हैं कि हम 3000 वोटों से हारे तो अहंकारी हो गए, लेकिन क्या तुम मऊ से 35 हजार वोटों से हारे तो संस्कारी हो गए?” उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अभी भी वक्त है, सामने आएं और चुनाव लड़कर देख लें।

विकास का मुद्दा और फूट की खबरों का खंडन

पार्टी में फूट की चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जो लोग बीजेपी में फूट की बात कर रहे हैं, वे गलतफहमी में हैं। उन्होंने कहा, “अगर हमारे बीच फूट है, तो फिर हम अपनी छाती अड़ाकर खड़े क्यों हैं?” उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी कि वे 55 वर्षों के अपने शासनकाल में विकास का केवल एक कार्य गिना दें।

उन्होंने दतिया के कायापलट का जिक्र करते हुए कहा, “जब मैं पहली बार दतिया आया था, तब यहां तांगे चलते थे, और आज यहां हवाई जहाज जैसी सुविधाएं हैं। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में दतिया में डाकुओं का राज हुआ करता था, लेकिन आज एक भी चिन्हित गिरोह नहीं है।” इस सभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद थे, जिन्होंने नरोत्तम मिश्रा के इस भावनात्मक जुड़ाव और पार्टी के प्रति निष्ठा की सराहना की। यह घटना स्पष्ट करती है कि दतिया के उपचुनाव को नरोत्तम मिश्रा केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि व्यक्तिगत परीक्षा और प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रहे हैं।

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