Narmada River Viral Video: मध्य प्रदेश के सिहोर जिले में एक धार्मिक आयोजन के बाद करीब 11,000 लीटर दूध को यू हीं नगी में बहा दिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुथ लोग इस आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं पर्यावरण से जुड़े लोग इसे गंभीर चिंता का विषय मान रहे हैं।
पातालेश्वर महादेव मंदिर में हुआ आयोजन
जानकरी के अनुसार, यह आयोजन Sehore जिले के भेरुंडा क्षेत्र के सतदेव गांव स्थित Pataleshwar Mahadev Temple में किया गया था। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां 21 दिनों तक धार्मिक अनष्ठान चला, जिसका समापन नदी में दूध अर्पित कर दिया गया। आयोजकों ने टैंकरों के माध्यम से दूध को नदी किनारे लाया और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं की मौजूदगी में इसे जल में बहा दिया।
आस्था बनाम पर्यावरण पर बहस
आयोजकों का कहना है कि यह परंपरा नदीं की पवित्रता बनाए रखते, लोगों की भलाई और सम़ृद्धि के लिए की जाती है। उनके अनुसार, यह धार्मिक विश्वास का हिस्सा है। हालांकि, इस घटना के सामने आने के बाद पर्यावरणविदों और आम लोगों के बीच इस पर बहस तेज हो गई है कि क्या इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
ऑक्सीजन स्तर पर पड़ सकता है असर

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में दूध जैसे कार्बनिक पदार्थ को नदी में डालने से पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है। इससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जलीय जीवों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है, क्योंकि ऑक्सीजन की कमी से उनका जीवन प्रभावित होता है।
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मानव और पशुओं पर भी खतरा
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि नदी के पानी पर निर्भर स्थानीय लोगों और पशुओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। यदि पानी की गुणवत्ता खराब होती है, तो यह पीने योग्य नहीं रह जाता और इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए ऐसे आयोजनों को अधिक जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ करने की जरूरत बताई जा रही है।
दूध बना प्रदूषण का कारण
पर्यावरणविदों का कहना है कि 11,000 लीटर दूध एक बड़े कार्बनिक प्रदूषक के रूप में काम करता है। यह पानी में सड़ने लगता है और इससे प्रदूषण बढ़ता है। इस कारण नदी की प्राकृतिक गुणवत्ता प्रभावित होती है और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नाराजगी जताई है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जहां देश में कई बच्चे दूध जैसी जरूरी चीजों से वंचित हैं, वहां इतनी बड़ी मात्रा में दूध को नदी में बहाना कितना उचित है। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि इस दूध को जरूरतमंदों में बांटा जा सकता था, जिससे सामाजिक और मानवीय दृष्टि से बेहतर परिणाम मिलते।
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