NALSAR Convocation: हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) का आगामी दीक्षांत समारोह मुख्य अतिथि को लेकर विवादों में घिर गया है। विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने प्रशासन से अपील की है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाए। छात्रों ने यह मांग हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘चलो संसद’ प्रदर्शन से जुड़ी कथित पुलिस कार्रवाई की सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणियों को लेकर उठाई है।
छात्रों ने CJI की कथित टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
छात्रों का कहना है कि संबंधित मामले में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े वीडियो पेश किए जाने के प्रस्ताव पर CJI की प्रतिक्रिया ने उन्हें चिंतित किया। छात्रों के अनुसार, सुनवाई के दौरान याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की अनुमति भी नहीं दी गई। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में न्याय तक पहुंच और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
प्रशासन को मिले कई आपत्ति पत्र
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, NALSAR प्रशासन को अलग-अलग बैच के छात्रों की ओर से कम से कम छह पत्र सौंपे गए हैं। इन पत्रों में प्रस्तावित मुख्य अतिथि के चयन पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है। छात्रों के मुताबिक, पहला पत्र 23 जुलाई को विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, प्रोफेसरों और प्रशासनिक अधिकारियों को दिया गया था। इसके बाद पांच अन्य पत्रों में भी समान चिंताओं का समर्थन किया गया।
संवैधानिक मूल्यों का दिया गया हवाला
छात्रों ने अपने पत्रों में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि यह विश्वविद्यालय के मूल्यों को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर भी होता है। कानून के विद्यार्थियों के रूप में उन्होंने संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत विचार-विमर्श को विश्वविद्यालय की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। छात्रों का कहना है कि मुख्य अतिथि का चयन भी इन्हीं मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।
छात्रों ने सार्वजनिक आचरण को लेकर उठाए सवाल
अपने ज्ञापन में छात्रों ने CJI की हालिया सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर असहमति जताई। उनका आरोप है कि सुनवाई के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो में रुचि नहीं दिखाने वाली टिप्पणियों से प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों को पर्याप्त महत्व न मिलने का आभास हुआ। हालांकि, ये छात्रों की आपत्तियां और उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचार हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
NALSAR में CJI की पारंपरिक भूमिका
NALSAR के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश का संबोधन एक पुरानी परंपरा रही है। छात्रों ने बताया कि 2026-27 बैच के दीक्षांत समारोह की तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है। ऐसे में वे चाहते हैं कि अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रशासन छात्रों की चिंताओं पर विचार करे। उनका कहना है कि समारोह विश्वविद्यालय और उसके विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर होता है।
विश्वविद्यालय से जवाब का इंतजार
छात्रों का दावा है कि अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनके पत्रों पर कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुलपति श्रीकृष्ण देव राव से संपर्क करने की कोशिशें सफल नहीं हुईं। वहीं, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इन पत्रों के बारे में जानकारी नहीं है। इस स्थिति के कारण छात्रों और प्रशासन के बीच आगे बातचीत की संभावना बनी हुई है।
सैकड़ों छात्रों के समर्थन का दावा
छात्रों ने यह भी दावा किया है कि उनके पत्रों और ज्ञापनों को संस्थान के सैकड़ों विद्यार्थियों का समर्थन हासिल है। एक छात्र के मुताबिक, प्रत्येक ज्ञापन पर करीब 70 से 80 छात्रों के हस्ताक्षर हैं और कुल समर्थकों की संख्या लगभग 350 से 450 के बीच हो सकती है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्टूडेंट बार काउंसिल ने रखा अपना पक्ष
NALSAR की स्टूडेंट बार काउंसिल से जुड़े एक छात्र ने कहा कि विद्यार्थी CJI के संवैधानिक पद का सम्मान करते हैं, लेकिन वे संविधान और संवैधानिक मूल्यों को लेकर भी अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। छात्रों का कहना है कि वे किसी ऐसी पहल का समर्थन नहीं करना चाहते, जो उनकी नजर में इन मूल्यों के विपरीत हो।
प्रशासन से संवाद की पेशकश
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बातचीत का विकल्प भी खुला रखा है। उनका कहना है कि मुख्य अतिथि के चयन पर पुनर्विचार के लिए छात्र प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बैठक हो सकती है। फिलहाल दीक्षांत समारोह की तारीख तय नहीं हुई है और विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों की मांग पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आपत्तियों को किस तरह लेता है और मुख्य अतिथि को लेकर अंतिम निर्णय क्या होता है।










